दरगाह में शिव मंदिर दावा प्रकरण: अगली सुनवाई 6 मई को
निसं
अजमेर (नवयत्न)। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार को अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान मामले में पक्षकार बनने के लिए दाखिल किए गए 12 प्रार्थना पत्रों पर विस्तृत बहस हुई। अदालत ने विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 6 मई तय की है।
मामले में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने वादी बनने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है, जबकि 12 अन्य लोगों ने प्रतिवादी पक्षकार बनने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किए हैं। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 10 पक्षकारों की बहस सुनी। वहीं, शनिवार को दो अन्य पक्षकारों द्वारा प्रार्थना पत्र पेश किए जाने पर उन्हें 6 मई को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई।
सुनवाई में वादी विष्णु गुप्ता, महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार, दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती, पीर नफीस मियां चिश्ती, काजी मुनव्वर अली सहित कई खादिम और अधिवक्ता मौजूद रहे।
वादी पक्ष के अधिवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि कोर्ट में ऑर्डर 1 / 10 के तहत कुल 12 आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें राजवर्धन सिंह परमार की ओर से वादी बनने के लिए आवेदन लगाया गया है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले में केवल उन्हीं व्यक्तियों को पक्षकार बनाया जाए जो सटीक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर न्यायालय की सहायता कर सकें। साथ ही उन्होंने राजवर्धन सिंह परमार के आवेदन को खारिज करने की मांग भी न्यायालय से की।
वहीं, खादिम पीर नफीस मियां चिश्ती, काजी मुनव्वर अली व अन्य की ओर से अधिवक्ता हाजी फैय्याज उल्ला ने बहस करते हुए कहा कि दरगाह से जुड़े लोगों की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए उन्हें पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खादिम सदियों से दरगाह की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं से जुड़े हुए हैं तथा वंशानुगत अधिकारों के तहत अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। ऐसे में उनकी बात सुने बिना इस मामले में कोई भी निर्णय न्यायोचित नहीं माना जा सकता।
दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील धार्मिक मामला है और इसमें वर्शिप एक्ट के तहत न्यायसंगत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का माहौल ठीक नहीं है और हर जगह धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ आते हैं और यहां हमेशा सर्वधर्म समभाव की परंपरा रही है।
मामले की अगली सुनवाई अब 6 मई को होगी, जिसमें शेष पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी।