आपत्ति पर लगा जाम, निर्णय ने किया रास्ता साफ

सुरेंद्र शर्मा 

झुंझुनू (नवयत्न)। 60 सदस्यीय झुंझुनू नगर परिषद में जनादेश किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दे पाया। कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीय 15 पार्षद चुने गए हैं। कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से महज एक सीट दूर है, जबकि भाजपा और निर्दलीय दोनों 15-15 सीटों पर हैं। ऐसे में सभापति की कुर्सी के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गुरुवार को सभापति पद के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान के नामांकन पर शहर के विपुल कुमार ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। जैसे ही आपत्ति की खबर शहर में फैली, लोगों के फोन घनघनाने लगे। चर्चा होने लगी कि क्या अब्दुल्ला का नामांकन निरस्त होगा और क्या भाजपा प्रत्याशी मनु धनकड़ के निर्विरोध निर्वाचन की राह खुल जाएगी।

कुछ ही देर में नगर परिषद परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी और नारेबाजी का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल मोर्चा संभाला और नगर परिषद क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित किया। इससे कुछ समय के लिए नगर परिषद के सामने यातायात भी प्रभावित हुआ, लेकिन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में रही।

 

दोनों पक्षों ने रखे दस्तावेज

 

आपत्ति के जवाब में कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान की लीगल टीम ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष तथ्यात्मक दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसी दौरान कांग्रेस की ओर से भी भाजपा प्रत्याशी मनु धनकड़ के नामांकन के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई गई। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और कानूनी दलीलों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी रामकरण सिंह ने निर्णय सुनाते हुए दोनों प्रत्याशियों के नामांकन वैध माने। इस निर्णय के साथ ही किसी भी प्रत्याशी का नामांकन निरस्त नहीं हुआ।

 

निर्णय के बाद सभापति पद का मुकाबला

 

अब सीधे कांग्रेस और भाजपा के बीच बना हुआ है। कांग्रेस की ओर से अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने वर्तमान विधायक राजेंद्र भाम्बू के दामाद मनु धनकड़ को प्रत्याशी बनाया है। अब सभापति का अंतिम फैसला चुने गए 60 पार्षदों के मतदान से होगा।

 

निर्णय के बाद प्रशासन की कार्रवाई की चर्चा

 

गुरुवार को नगर परिषद के सामने कुछ समय के लिए लगे जाम को हटाने में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई नजर आई। वहीं निर्वाचन अधिकारी के फैसले के बाद शहर में फैसले को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई। आमजन के एक वर्ग ने इसे निष्पक्ष निर्णय बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच के बाद नियमों के आधार पर फैसला किया गया और किसी दबाव में आए बिना दोनों नामांकन वैध रखे गए।

दूसरी ओर, नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराने की कवायद को लेकर विधायक राजेंद्र भाम्बू को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रूप से अपरिपक्व कदम बताया और कुछ ने इसे ‘बचकानी हरकत’ तक करार दिया। सोशल मीडिया पर विधायक के खिलाफ कई टिप्पणियां और पोस्ट भी देखने को मिली। भाजपा से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की ओर से भी इशारों-इशारों में तंज कसने वाली पोस्ट चर्चा में रही।

 

हालांकि अब निर्वाचन अधिकारी के निर्णय के बाद आपत्ति का अध्याय समाप्त हो गया है और सभापति पद के लिए असली राजनीतिक परीक्षा शुरू हो गई है। बहुमत से कांग्रेस महज एक कदम दूर है, जबकि भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में अगले चरण में किस दल के साथ कितने निर्दलीय पार्षद खड़े होते हैं, यही नगर परिषद की सत्ता की दिशा तय करेगा।

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