मौलाना मोहम्मद इरशाद कासमी की ईद के मौके पर मुसलमानों से अपील
बीकानेर,(देवेंद्र स्वामी)21मई। रमजानुल मुबारक का बहुत ही थोड़ा हिस्सा अब बाकी रह गया है। लिहाजा तमाम अहले ईमान अपने रोजमर्रा के आमाल के साथ अधिक से अधिक तौबा, इस्तिगफार का इहतिमाम और दुआ करें कि अल्लाह तआला हर प्रकार की आजमाइश से पूरी इन्सानियत की हिफाजत फरमाए। आमीन दूसरी बात विशेष रूप से यह अर्ज करनी है कि लॉकडाउन के आरम्भ और उसके बाद रमजान शरीफ के अवसर पर जुमा, जमाअत, तरावीह एंव अन्य आमाल के सम्बन्ध मे दारूल उलूम देवबन्द और फिर उसी के अनुसार अन्य इदारों की तरफ से जो हिदायात दी गई थी उन पर अमल की बरकत से अल्लाह ने हर परेशानी से हमारी हिफाजत फरमाई, अब इस समय ईदुल फित्र का त्यौहार हमारे सामने है और देश मे लॉकडाउन 4 जारी है। जिस की एडवाइजरी के अनुसार धार्मिक आयोजन पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित हैं। इसी को देखते हुवे “दारूल उलूम” और “जमिअत उलमा” की ओर से आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये जा चुके हैं जो हम सब के लिये सर्वमान्य हैं और इसी को ध्यान मे रखते हुवे स्थानीय स्तर पर कुछ बिन्दु निर्धारित किये जा रहे हैं आशा करता हूं कि अति गंभीरता के साथ इनका पालन करके जिम्मेदार नागरिक होने का सुबूत देंगे।
(1) इस समय मस्जिदों में सीमित संख्या (इमाम सहित 4 व्यक्ति) एंव अन्य शर्तों के साथ जुमा, जमात और तरावीह की नमाजें अदा की जा रही है। इसी के अनुसार ईद की नमाज भी अदा की जाए।
(2) जो मुसलमान सीमित संख्या की शर्त के कारण मस्जिद मे ईद की नमाज अदा करने से विवश हों वे लोग इमाम के अलावा कम से कम 3 बालिग मर्दों के साथ घर की बैठक/ बाहरी रूम मे ईद की जमात करें ।
(3) मौजूदा पाबन्दियों के कारण जिन लोगों के लिये ईद की नमाज की कोई शक्ल ना हो तो एैसे लोग मजबूर है और उन से ईद की नमाज माफ है और वे गुनहगार नहीं हैं। एैसे लोगों को चिन्ता की कोई आवश्यकता नहीं है। परन्तु ये लोग ईद के वक्त 2 या 4 रकात चाश्त की पढ़ लें तो यह उन के लिये मुस्तहब है और अल्लाह के दरबार मे ईद की फजीलत व सवाब हासिल होने की उम्मीद है।
(4) ईद के अवसर पर हमारे यहां रिश्तेदारों/ दोस्तों के यहां अवागमन एंव स्नेह मिलन की स्वर्णिम परम्परा है जो इस महामारी के समय मे अनुचित बल्कि घातक हो सकती है। लिहाजा अपनी एंव परिवार की सुरक्षा हेतु अपने घर में ही रहें तथा अनावश्यक निकट या दूर कहीं भी ना जाए।
(5) ईद की नमाज के बाद विशेष रूप से हाथ मिलाने का भी रिवाज है जो धार्मिक रूप से अनावश्यक होने के साथ ही महामारी की रोक थाम हेतु सरकारी दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन है