सेना वीर चक्र प्राप्त मंगल सिंह सिसोदिया का निधन, ससुराल वाहिदपुरा में दी श्रद्धांजलि
मंडावा,(किशोर सिंह जाटू )26 मई। सेना वीर चक्र प्राप्त मंगल सिंह सिसोदिया के निधन पर ससुराल वाहिदपुरा में दौड़ी शोक की लहर, ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि देकर लाडले जवाई को किया नमन. निंबो का तालाब जोधपुर निवासी मंगल सिंह सिसोदिया का 23 मई को निधन हो गया जिस पर गांव वाहिदपुरा में ससुराल पक्ष की ओर से मंगलवार को लॉक डाउन को लेकर सोशल डिस्टेंस की पालना करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जिसमें ग्रामीणों ने सिसोदिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने वालों में डॉक्टर कमला दूलर्, ठेकेदार अमर सिंह, ओमजी, जीवन खीचड़, मदन मीणा, सतपाल सिंह निर्माण, विद्याधर दूलर्, विक्रम सिंह गोपाल जी का सहित दीपेंद्र सिंह, दिलीप सिंह शेखावत, सहित ग्रामीण शामिल थे। उल्लेखनीय है कि निंबो का तालाब जोधपुर निवासी मंगल सिंह सिसोदिया का विवाह 22 जनवरी 1973 को वाहिदपुरा निवासी ठाकुर हरी सिंह शेखावत हरिराम की सुपुत्री भंवर कवर के साथ हुआ था। मंगल सिंह सिसोदिया 22 जनवरी 1970 को भारतीय सेना में नियुक्त हुए थे तथा प्रथम विश्व में युद्ध 1971 मैं भारत पाकिस्तान के बीच जो हुआ उसमें अपना शौर्य छाया तथा दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे वही 1972 में मंगल सिंह सिसोदिया को सैन्य समान वीर चक्र महामहिम राष्ट्रपति वीवी गिरी द्वारा प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध सन 1971 की लड़ाई में बीकानेर बॉर्डर पर हिंदुमलकोट पर भारत व पाकिस्तान की सेनाएं आमने-सामने थी काफी सैनिक हिंदुस्तान के भी शहीद हो चुके थे और पाकिस्तान की सेना को भी काफी सैनिकों को मंगल सिंह और उनकी बटालियन ने मार गिराया था इसी दौरान मंगल सिंह के सीने में और शरीर पर कई गोलियां लग गई और घायल अवस्था के अंदर वीरता पूर्वक साहस के साथ पाकिस्तान के 3 दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया था और उसके बाद अचेत अवस्था में पाय गए फिर इनको सैनिकों द्वारा बीकानेर एवं बाद में दिल्ली मिलिट्री अस्पताल में ले जाया गया जहां इनका 2 महीने इलाज चला और हालत में सुधार आया उसके बाद भारत की सेना द्वारा इनको नौकरी से वीर चक्र देकर सम्मान के साथ विदाई दी गई एक सिविल सैनिक सिपाही होने के नाते वीर चक्र मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि है बहुत ही सहज सरल एवं इमानदार व्यक्तित्व के धनी सिसोदिया समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। 