कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर विवाहिताओं व युवतियों ने बनाई ईसर-गणगौर की प्रतिमा

ललित दाधीच

राजलदेसर (नवयत्न ) । विवाहिताओं व युवतियों ने कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर गणगौर की प्रतिमा बनाएगी म्हारे दादोजी र मांडी गणगौर.., दादसरा घड़ायो रंगरो झुमकड़ो…, सहित कई राजस्थानी लोकगीतों के साथ नवविवाहिताओं ओर युवतियों ने बुधवार की शाम गणगौर का निर्माण किया। दोपहर बाद से ही नवविवाहित युवतियां कुम्हार के घर से मिट्टी के ईसर व गणगौर की प्रतिमा बनवाकर घर लाईं। ईसर (शिवजी), गणगौर (पार्वती माता) को नाचते-गाते घर लेकर आईं। इस दौरान नवविवाहिताओं ने सुहाग के दीर्घायु व युवतियों ने अच्छे वर की कामना को लेकर पूजा की। वहीं, गुरुवार को गौर को पानी पिलाने और घर-घर में बनाैरा निकालने की रस्म शुरू होगी। बुधवार की रात से गणगौर त्योहार तक म्हारा हरा ए जंवारा राज…, गेहूं लाल सर से बड़ा…जैसे अनेक लोक गीतों की आवाज सुनाई पड़ेगी। सुबह गणगौर पूजन, शाम काे पानी पिलाने व बनौरा निकालने की रस्म और रात को गीतों में महिलाएं व्यस्त रहेंगी। होली के बाद से 16 दिन तक चलने वाला पर्व है युवतियों में खास उत्साह देखने के लिए मिला ।

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