शिक्षा अधिकार पर संकट: अभिभावकों से कथित दुर्व्यवहार, मंत्री ने ज्ञापन लेने से किया इंकार

 

नवरतन अग्रवाल

जयपुर (नवयत्न)। राज्य में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते अभिभावक परेशान हैं, जबकि सरकार की चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

 

इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने बुधवार को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के सरकारी आवास पर ज्ञापन देने का प्रयास किया। संघ का आरोप है कि अभिभावकों को डेढ़ से दो घंटे तक बाहर इंतजार करवाया गया। बाद में जब मंत्री पहुंचे तो उन्होंने संगठन की ओर से ज्ञापन लेने और सामूहिक रूप से बात सुनने से इनकार कर दिया।

 

इस घटना से उपस्थित अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। संघ के अनुसार, करीब 50 अभिभावक मौके पर मौजूद थे और मंत्री का यह रवैया आपत्तिजनक रहा। आरोप है कि मंत्री ने केवल व्यक्तिगत मामलों को सुनने की बात कही, जिसे संघ ने अभिभावकों की एकजुटता तोड़ने की रणनीति बताया।

 

इसके अलावा, मंत्री के स्टाफ द्वारा मौके पर फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी रोक लगाने का आरोप लगाया गया है। कुछ अभिभावकों के मोबाइल से फोटो और वीडियो हटवाने की भी बात सामने आई है।

 

संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आरटीई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और निजी स्कूल खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

संघ के अनुसार प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:

  1. लॉटरी में चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा
  2. दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में देरी
  3. पोर्टल पर जानकारी अपडेट न होना
  4. प्रोविजनल अलॉटमेंट के बाद भी आवेदन निरस्त होना

 

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने मंत्री के व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था चरम पर है और न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा मंत्री अभिभावकों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

 

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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