Home झुंझुनूं मित्रता में ईमानदारी और समर्पण का भाव जरूरी – राजाराम

मित्रता में ईमानदारी और समर्पण का भाव जरूरी – राजाराम

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चिड़ावा (विजेंद्र सिंह लमोरिया)। गोगाजी की ढाणी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन तुलसी पीठ, चित्रकूट धाम, कृष्ण-सुदामा की मित्रता प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। अयोध्या के कथावाचक राजाराम महाराज ने कहा कि मित्रता में ईमानदारी और मित्र के प्रति समर्पण का भाव होना बहुत जरूरी है। विपत्ति के समय काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है।

भगवान कृष्ण ने भी अपने मित्र सुदामा की विपत्ति के समय मदद की। उनकी मित्रता समाज के लिए अनुकरणीय है। कथा के प्रारंभ में पंडित अखिलेश कुमार ने भागवत व व्यास पूजन करवाया। इस दौरान मक्खन सांखला, जगदीश स्वामी, मनोज, सन्तोष सैनी, किशोर स्वामी, राजेन्द्र सांखला, लीलाधर माखरिया सहित काफी संख्या में पुरुष-महिला श्रद्धालु मौजूद रहे।

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