संतों के सानिध्य में हुआ वैचारिक महासंगम

निलेश मुद्गल

झुंझुनूं (दैनिक नवयत्न ) । आयोजित हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी को संबोधित करते मुख्य अतिथि प्रेमचंद झा व मंचासीन संत-महात्मा और गणमान्यजन।
सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता के प्रखर संदेश के साथ झुंझुनूं की धरती सोमवार को ‘हिंदू राष्ट्र’ के वैचारिक स्वर से गूंज उठी, जब शहर में संतों के सानिध्य में एक विशाल “हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धर्माचार्यों, सामाजिक संगठनों और सर्व समाज की उल्लेखनीय भागीदारी ने इसे एक भव्य वैचारिक मंच और सांस्कृतिक चेतना के महासंगम का रूप दे दिया।
यह संगोष्ठी सोमवार शाम पांत का अखाड़ा, शनि मंदिर परिसर, गौशाला रोड, झुंझुनूं अकैडमी स्कूल के पास आयोजित हुई, जिसमें पुरी शंकराचार्य परंपरा के कृपापात्र शिष्य, ‘विश्व ब्राह्मण भूषण’ से सम्मानित तथा आदित्य वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रेमचंद झा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन धर्म की रक्षा, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि बताते हुए समाज को जागरूक और संगठित रहने का आह्वान किया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं बल्कि जीवन की शाश्वत व्यवस्था है, जो राष्ट्र को सांस्कृतिक शक्ति और सामाजिक समरसता प्रदान करती है। समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चिंतन-मंथन किया।
आयोजकों ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य एक सुसंस्कृत, शिक्षित, सुरक्षित, समरस और सेवाभावी समाज के निर्माण का संकल्प मजबूत करना है, ताकि सनातन मूल्यों के आधार पर राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यक्रम का आयोजन विप्र सेना राजस्थान, पुजारी सेवक महासंघ झुंझुनूं तथा सर्व समाज के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए।
संगोष्ठी के संयोजक गुलझारी लाल शर्मा, विनोद पुजारी और महेश बसावतिया ने बताया कि यह आयोजन केवल एक सभा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता का व्यापक अभियान है, जो आने वाले समय में सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर विशेष धर्म अधिकारी रामानंद जी पाठक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पवन पुजारी, श्याम सुंदर लालपुर, गणेश चैतन्य महाराज मण्डावा, हरिकिशन शुक्ला, रघुनाथ पोदार और समाजसेवी गायत्री शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. भावना शर्मा ने किया। संगोष्ठी के दौरान उपस्थित लोगों ने सनातन संस्कृति की रक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प भी लिया।

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