सांप्रदायिक सद्भाव से मजबूत होगा समाज, मानवता को दें सर्वोच्च स्थान
श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न)। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत तीसरे दिन को सांप्रदायिक सद्भावना दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों एवं समुदायों के बीच प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक एकता और शांति के लिए सद्भावना एवं परस्पर सम्मान आवश्यक है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नदीम अहमद नदीम ने कहा कि समाज की मजबूती आपसी सद्भाव और विश्वास पर निर्भर करती है। धर्म एवं विचारों की विविधता हमारी सामाजिक शक्ति है। उन्होंने कहा कि भेदभाव और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। आचार्य तुलसी के अणुव्रत संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति के आचरण में नैतिकता तथा समाज में सौहार्द स्थापित करने की प्रेरणा देता है। इंद्रचंद वैद कविराज ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव केवल किसी एक आयोजन तक सीमित रहने वाला विषय नहीं, बल्कि इसे दैनिक जीवन में संस्कार के रूप में अपनाने की जरूरत है। प्रत्येक व्यक्ति यदि दूसरे धर्म, भाषा और विचारों का सम्मान करे तो समाज में शांति, प्रेम और विश्वास का वातावरण निर्मित हो सकता है। उन्होंने अणुव्रत के सिद्धांतों को सामाजिक समरसता का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम में अणुव्रत समिति अध्यक्ष रमेश कुमार व्यास ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दौरान आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया। मंत्री गजेंद्र पारख ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष हंसराज भूरा, पूर्व अध्यक्ष मनोज घीया, महावीर नाहटा, संदीप चौरड़िया, रोहित संचेती, अरुण भूरा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थितजनों ने सांप्रदायिक सद्भाव, मानवता, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।