गोविंद देवजी मंदिर में हुई भगदड़ की मॉक ड्रिल
निसं
जयपुर (नवयत्न) । जयपुर के आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर परिसर में अचानक भगदड़ की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। करीब 45 मिनट तक विभिन्न विभागों की टीमें मंदिर परिसर में मोर्चा संभाले रहीं। बाद में श्रद्धालुओं को पता चला कि यह पूरी कार्रवाई मॉकड्रिल थी। हालांकि, मॉकड्रिल के दौरान मंदिर की आपातकालीन व्यवस्थाओं में कई खामियां सामने आई। मॉकड्रिल की शुरुआत राजभोग की झांकी के दौरान टेंट गिरने और श्रद्धालुओं के घायल होने की स्थिति बनाकर की गई। सूचना मिलते ही संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया और उनके रिस्पॉन्स टाइम की जांच की गई। पुलिस, चिकित्सा, नागरिक सुरक्षा और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। मॉकड्रिल के दौरान फायर फाइटिंग सिस्टम की तैयारियों की भी जांच की गई। हाइड्रेंट के वॉल्व खोलने पर पानी का पर्याप्त प्रेशर नहीं बन पाया। जांच में पंप हाउस भी बंद मिला। ऐसे में यदि वास्तव में आग लगने जैसी आपात स्थिति होती तो शुरुआती स्तर पर अग्निशमन व्यवस्था को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती थी। आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को अलर्ट करने के लिए लगाए गए सायरन और अनाउंसमेंट सिस्टम की भी स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। चार हूटर में से केवल तीन ही चालू पाए गए, जबकि अनाउंसमेंट सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था। ऐसे में भगदड़ या अन्य आपात स्थिति में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तक तत्काल सूचना पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मॉकड्रिल के दौरान पुलिस, चिकित्सा, नागरिक सुरक्षा और फायर ब्रिगेड के बीच समन्वय की भी जांच की गई। इस दौरान विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल में कमी सामने आई। मॉकड्रिल का उद्देश्य ऐसे ही बिंदुओं को चिन्हित कर वास्तविक आपदा की स्थिति में व्यवस्था को बेहतर बनाना था। थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर मॉकड्रिल आयोजित की गई। इसका उद्देश्य मंदिर में भगदड़ जैसी आपात स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस, बचाव दल और अन्य संबंधित विभागों की तैयारियों को परखना था। सभी टीमों के मौके पर पहुंचने और राहत कार्य शुरू करने के समय को भी नोट किया गया। एडीएम साउथ युगांतर शर्मा ने बताया कि मॉकड्रिल में सामने आई कमियों को देखते हुए मंदिर प्रबंधन को आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रस्तुत नक्शे और मॉकड्रिल के निष्कर्षों पर पुलिस के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद मंदिर के लिए आपदा प्रबंधन और आपातकालीन निकासी का अंतिम प्लान तैयार किया जाएगा।