चूरू. ( अजय स्वामी ). करीब आठ सौ हैक्टेयर में फैले एशिया विख्यात तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य में काले हिरणों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। इनके लिए अभयारण्य के विस्तार की आस जगी थी, लेकिन अब भी ये ठंडे बस्ते में है। हरिणों की अधिकता को देखते हुए जसवंतगढ़ के ताल में 278 हैक्टेयर भूमि वन विभाग ने अधिगृहित की थी। कसुम्बी-सुजानगढ़ कच्चे मार्ग के पास 278 हैक्टेयर भूमि के चारों तरफ करीब छह किमी लम्बी और चार फीट ऊंची खाई बनवा दी गई है। खाई के काम में करीब 15 लाख रुपए लगे हैं। बीड़ में पानी रोकने के लिए ट्रेंच बनाकर घास की बिजाई की गई है। शिफ्टिंग से पहले हरिणों के लिए पानी का एक तालाब बनाया जाना था लेेकिन ये काम भी नहीं हो पाया। ताल छापर अभयारण्य में हरिणों का घनत्व करीब तीन गुना बढ़ गया। विशेषज्ञों की मानें तो एक हरिण के लिए एक हैक्टेयर भूमि की जरूरत होती है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते हिरणों का शिफ्ट नहीं किया गया तो इनके अस्तित्व पर खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि वर्तमान में तालछापर अभयारण्य में करीब 3200 काले हिरण विचरण कर रहे हैं।
लाखों का बजट आया
काले हिरणों की शिफ्टिंग के मामले को लेकर एसीएफ दिलीपसिंह राठौड़ ने बताया कि आरपीएससी योजना के तहत वर्ष 2016 के अंत तक करीब 25 लाख रूपए का बजट आया था, जिसमें जसवंतगढ़ ताल में जूलीफ्लोरा निकलवाने सहित वाटर बॉडी व फेंसिंग का काम करवाया गया था। इसके अलावा हिरणों के खाने के लिए घास भी वहां के मैदानों में लगवाई गर्ई थी। एसीएफ ने बताया कि हिरणों की लगातार बढ रही संख्या को देखते हुए उनकी शिफ्टिंग करवाना जरूरी है मगर, इसमें कई बाधाएं आ रही हैं। जिसमें तालछापर अभयारण्य से जसवंतगढ़ की दूरी करीब 16 किमी है, वहीं एक मेंगा हाइवे व तीन सड़कें हैं। इसके अलावा खेतों में लगी फेंसिंग भी बड़ी बाधा है। उन्होंने बताया कि तालछापर से सटे नमक उद्योग की कई बंद इकाईयों को लेकर करीब 300 हैक्टेयर जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव उपर भेजे गए हैं।
इनका कहना है:
हिरणों की शिफ्टिंग में हो रही देरी चिंता का विषय है, डब्ल्यूआइआइ ने अपनी रिपोर्ट में जल्द शिफ्टिंग की बात कही है। मेरे समय में जसवंतगढ़ में कई कार्य हुए। अब देरी हो रही है तो विभाग को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
सूरतसिंह पूनिया, प्रदेश सदस्य, जीव जंतु कल्याण बोर्ड।
कृषण मृगों की शिफ्टिंग के मामले में प्रस्ताव अभी उच्च स्तर पर ओके नहीं हुआ है। आगे क्या तय होगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। जो भी तय होगा उसी के मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।
सविता दहिया, डीएफओ, चूरू



















