कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन

विनोद स्वामी
मुकुन्दगढ़ (नवयत्न) । वार्ड न 1 स्थित शिव मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत मे व्यास पीठ से कथा व्यास चित्रकूट के अवधेश शास्त्री ने कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी एवं गोवर्धन पूजा की कथा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि नंदोत्सव के बाद पूतना का वध किया गया। पूतना वासना एक वासना है जब तक हमारे जीवन मे वासना दूर नही होगी तब तक प्रभु की कृपा नही होगी। नन्द बाबा ने अपना सर्वशः लुटाया क्योंक़ी स्वयं लक्ष्मी बैकुंठ को त्यागकर गोकुल में आई और गोकुल की रज मे रमण करने लगी। भगवान ने गोपियों के घर जाकर माखन चुराया। इस कथा से भगवान हमारा भी मन रूपी माखन चुराए तब जाकर प्रभु का साक्षात्कार होगा। प्रभु ने वृंदावन में बाल लीलाये गोपियों के साथ कि व अघाशुर का वध किया। अघाशुर पाप है प्रभु ने अपने भक्तों को अघाशुर पाप से निकालकर व्रज वासियो को भक्ति प्रदान की। प्रभु का दो बार प्रत्यक्ष रूप से पान किया व ब्रम्हा जी का अहंकार दूर किया । भगवान व्रज मे गोप बनकर रहते की कथा के प्रसंग में सुनाया की ब्रह्माजी को आश्यर्च हुआ कि श्री कृष्ण ने व्रज वासियों की जूठन खाई। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रम्हा जी का अहंकार दूर किया। भगवान श्रीकृष्ण ने भक्ति रूपी यमुना में पाखंड रूपी कालीयां नाग को दूर किया। भगवान कहना चाहते है मेरी भक्ति में जो पाखंड करता है व मुझे अच्छा नही भक्ति में प्रेम हो वही मुझे स्वीकार है। सभी व्रज वासियो ने गिरिराज पूजन किया। भगवान की आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर सांवर मल शर्मा, दिलीप कुमार, दिनेश चेजारा, राजाराम शर्मा, सुनीता किरोड़ीवाल, नूतन, सरोज देवी, शारदा देवी, राजू देवी, संतोष देवी, दया देवी, मंजू देवी, विमला देवी, द्रोपदी देवी, धापू देवी, छोटू देवी, बेबी देवी सहित बड़ी संख्या मे भक्तगण मौजूद रहे।

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