गुरुकुलों से ही सनातन धर्म का संरक्षण संभव — पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा
ललित दाधीच
राजलदेसर (नवयत्न)। भगवती भद्रकाली शक्ति पीठ वैदिक सनातन संस्कृति संरक्षण संस्थान, राजलदेसर की स्थापना के द्वितीय दिवस का समारोह संतों, वेद विद्या के विद्वानों एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति में प्रारम्भ हुआ । गुरुकुलों से होगा भारत का नवोत्थान — आचार्य सियारामदास समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य सियारामदास नैयायिक ने कहा कि गुरुकुलों की स्थापना से भारतवर्ष का नवोत्थान संभव है। उन्होंने कहा कि वेदों का अध्ययन जहां मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं संस्कारयुक्त शिक्षा से व्यक्ति का लौकिक जीवन भी सुसंस्कृत बनता है। उन्होंने वेद विद्या में शुद्ध उच्चारण के महत्व पर विशेष बल दिया तथा कहा कि जो संस्थान आत्मतत्त्व का ज्ञान कराए, वही वास्तविक गुरुकुल है। गुरुकुल संचालन कष्टसाध्य, फिर भी अत्यंत आवश्यक — संत विमर्शानंद महाराज शिवबाड़ी, बीकानेर के अधिष्ठाता संत विमर्शानंद महाराज ने कहा कि गुरुकुलों का संचालन अत्यंत कष्टसाध्य कार्य है, जिसमें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में भारत में 45 हजार से अधिक गुरुकुल थे, जिनकी ख्याति देश-विदेश तक फैली हुई थी। भारतीय शिक्षा पद्धति का मूल आधार गुरुकुल ही रहे हैं आचरण निर्माण का केंद्र है गुरुकुल भगवान सहाय शर्मा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुकुल ही ऐसा स्थान है, जहां आचरण की श्रेष्ठ शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ आचरण ही जीवन को अनुशासित और परिपूर्ण बनाता है। धर्म के स्तंभों की स्थापना में गुरुकुलों की भूमिका — आचार्य बालकृष्ण कौशिक कहा कि धर्म के सात स्तंभों में से पांच स्तंभ गुरुकुलीय शिक्षा के माध्यम से ही स्थापित होते हैं, जिससे समाज में नैतिकता और संस्कारों का विकास होता है।पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म का संरक्षण गुरुकुलों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि उनके क्षेत्र में इतना भव्य गुरुकुल स्थापित हुआ है, जो भविष्य में आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा। इस अवसर पर पूर्व मंत्री रिणवा का संतों के सान्निध्य में माला एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया गया।कार्यक्रम के दौरान वैदिक गुरुकुलम् के संस्थापक दण्डी स्वामी जोगेंद्राश्रम महाराज के सान्निध्य में सहयोगी श्रद्धालुओं का सम्मान किया गया। भगवती भद्रकाली शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर शिवेन्द्राश्रम महाराज भी मौजूद रहे । मंच संचालन डॉ. चेतन स्वामी द्वारा किया गया।