दो दिवसीय प्राकृत भाषा राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न

अबुबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न)। जैन विश्वभारती स्थित महाश्रमण विहार में अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत विद्वत् कार्यशाला का शनिवार को समापन समारोह आयोजित हुआ। इस सत्र में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि प्राकृत भाषा को आगे बढाने एवं उत्थान के लिए विद्वजनो का समन्वय होना चाहिए। आचार्यश्री ने विद्वानों की साहित्यिक कृतियों का अवलोकन करते हुए कहा कि अधिक से अधिक प्राकृत भाषा में साहित्य रचना बढनी चाहिए। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि दो दिवसीय कार्यशाला में प्राकृत भाषा के सभी विद्वतज्जन एकत्रित होकर कार्य करेगें, इसके साथ ही एक राष्ट्रीय मंच भी बनाने पर चर्चा हुई है। इसके अलावा संस्थान के प्रोजेक्ट कार्य के साथ स्वतंत्र रूप से पुस्तक संपादन पर भी सहमति बनी। इस अवसर पर प्रो. प्रेम सुमन जैन, प्रो. धर्मचन्द्र जैन, प्रो, जगतराम भट्टाचार्य, प्रो. हरिशंकर पाण्डेय, प्रो. विजय कुमार जैन, प्रो. सुषमा सिंघवी, प्रो. कल्पना जैन, प्रो दामोदर शास्त्री ने अपने संबोधन में बौद्धिक परंपराओं और प्राकृत भाषा के विविध मुखी साहित्यिक योगदान की चर्चा करते हुए अपने विचार साझा किए। अकादमिक सत्र में ’शोध समीक्षा एवं भावी योजनाओं पर चर्चा’ की गई। जिसमें ’प्राकृत शोध समीक्षा एवं भावी शोध योजनाओं हेतु शासकीय अनुदान’ विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. जितेन्द्र बी. शाह (पूर्व निदेशक, एल.डी. इंस्टिट्यूट ऑफ इंडोलॉजी, अहमदाबाद) ने की।

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