जहां पहुंचे, वहां हरियाली छोड़ गए… एक लाख से ज्यादा पौधे

 

निसं

चूरू (नवयत्न)। राजस्थान के रेगिस्तान में जहां लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं एक शिक्षक पिछले चार दशक से हरियाली की ऐसी इबारत लिख रहे हैं, जिसकी छांव आने वाली पीढ़ियां महसूस करेंगी। चूरू के व्याख्याता निहाल सिंह लांबा आज सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि हजारों पेड़ों के संरक्षक और पर्यावरण संरक्षण की एक जीवंत मिसाल बन चुके हैं।

 

उनकी पहचान ऐसी बन गई है कि लोग कहते हैं—जहां निहाल सिंह की पोस्टिंग होती है, कुछ वर्षों बाद वहां बंजर जमीन नहीं, हरियाली नजर आती है।

 

स्वतंत्रता सेनानी पिता नारायण सिंह लांबा से मिली प्रकृति प्रेम की विरासत को उन्होंने अपना जीवन मिशन बना लिया। युवावस्था में शुरू हुआ पौधरोपण का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है। अब तक वे एक लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं और हर पौधे को बच्चे की तरह पालकर वृक्ष बनाने तक उसकी देखभाल करते हैं।

 

डाइट परिसर बना हरियाली का मॉडल

 

जिलाशिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), चूरू के परिसर में कभी बंजर जमीन और सूना वातावरण था, वहां आज 157 से अधिक प्रजातियों के 13000 से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं। औषधीय पौधों से लेकर छायादार वृक्षों तक, पूरा परिसर अब एक जीवंत हरित प्रयोगशाला बन चुका है। ओर यह सब निहाल सिंह लांबा के प्रयासों से हुआ यहां पोस्टिंग के दौरान उन्होंने काफी पेड़ लगाए ।

 

सिर्फ पौधे नहीं, पर्यावरण के प्रहरी भी तैयार कर रहे

 

निहाल सिंह लांबा केवल पौधे नहीं लगाते, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी जगाते हैं। वे उन्हें पौधारोपण, संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का महत्व समझाते हैं। इसका असर यह है कि कई छात्र-छात्राएं अपने गांवों में भी पौधरोपण अभियान चला रहे हैं।

 

विद्यार्थियों का कहना है कि पहले जहां परिसर सूना दिखाई देता था, आज चारों ओर हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और स्वच्छ वातावरण मन को सुकून देता है।

 

सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं थमेगा सफर

 

निहाल सिंह लांबा कहते हैं कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित रहेगा। उनका मानना है कि पेड़ लगाना एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों तक निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।

 

 

 

परिवार भी बना इस हरित अभियान का मजबूत साथी

 

निहाल सिंह लांबा की इस चार दशक लंबी पर्यावरण यात्रा में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उनकी पत्नी कुलदीप लांबा बताती हैं कि निहाल सिंह ने हमेशा पेड़ों को परिवार के सदस्य की तरह माना है। छुट्टियां हों या अवकाश, उनका अधिकांश समय पौधों की देखभाल में ही बीतता है। कई बार पूरा परिवार भी उनके साथ पौधारोपण और पौधों की सुरक्षा के कार्य में जुड़ जाता है।

 

कुलदीप लांबा कहती हैं, “पेड़ लगाना उनके लिए केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य है। हमने हमेशा उन्हें इसी काम के लिए प्रेरित किया है। आज जब वर्षों पहले लगाए गए पौधे विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छाया और स्वच्छ हवा दे रहे हैं, तो पूरे परिवार को गर्व महसूस होता है।”

 

वहीं उनकी बेटी मोनिका कहती हैं, “बचपन से हमने पापा को पौधों की सेवा करते देखा है। उन्होंने हमें सिखाया कि प्रकृति से प्रेम करना ही सबसे बड़ी सेवा है। आज जब लोग उन्हें ‘ग्रीन मैन’ के नाम से पहचानते हैं तो हमें बेहद गर्व होता है। उनके इस मिशन को आगे बढ़ाना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।”यह वर्जन फीचर स्टोरी को भावनात्मक स्पर्श देगा और बताएगा कि निहाल सिंह लांबा के पर्यावरण मिशन के पीछे उनका परिवार भी एक मजबूत सहारा रहा है।

 

जहां भी गए, वहां छोड़ गए हरियाली की पहचान

 

तारानगर, सरदारशहर और चूरू क्षेत्र के अनेक सरकारी विद्यालयों, श्मशान भूमि, सार्वजनिक स्थलों, शिक्षा विभाग के कार्यालयों और गांवों में वे हजारों पौधे लगाकर उन्हें वृक्ष बना चुके हैं। अब तक लांबा तारानगर तहसील के गांव करणपुरा, भालेरी, सोमासी, सरदारशहर तहसील के गांव साड़ासर, गिड़गिचिया, चूरू के गाजसर, झारिया, पारख बालिका, बागला राजकीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी सहित विभिन्न गांव के राजकीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं देकर वहां को हरा-भरा बना चुके हैं. इसके अलावा लाम्बा ने डीईओ ऑफिस, जेडी ऑफिस सहित शमशान भूमि व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी पौधे लगाए हैं, आज वे स्थान उनकी पहचान बन चुके हैं। वर्तमान में निहाल सिंह लांबा की पोस्टिंग चार साल से झारिया गांव के राजकीय विद्यालय में हैं।

 

एक व्यक्ति, हजारों पेड़ और अनगिनत प्रेरणाएं

 

बढ़ते तापमान, घटते भूजल और बिगड़ते पर्यावरण के दौर में निहाल सिंह लांबा का काम यह साबित करता है कि बदलाव किसी बड़ी योजना से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संकल्प से भी शुरू हो सकता है। उन्होंने यह दिखाया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो रेगिस्तान की धरती भी हरियाली से मुस्कुरा सकती है।

 

मरुधरा की तपती रेत पर निहाल सिंह लांबा केवल पेड़ नहीं लगा रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ठंडी छांव, स्वच्छ हवा और उम्मीद का भविष्य तैयार कर रहे हैं।

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