40 वर्षों से सिलाई केंद्र चलाकर खेतङी का रामकृष्ण मिशन बना रहा है महिलाओं को आत्मनिर्भर
खेतङी,(जयंत खांखरा)27 मई। वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रभाव से प्रवासी कामगारों के अपने घरों के लिये प्रस्थान जहॉं उनको अपनों के बीच जाने का संतोष दे रहा है वही जीवन यापन के लिये स्थायी रोजगार को लेकर चिंता भी स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत की ओर बढना और स्थानीय कार्यकौशल को बढा कर रोजगार अपनाने से आशा की एक किरण नजर आती है।
स्थानीय कच्चा माल, कौशल, प्रचलित व परम्परागत कुटिर उद्योग को स्थानीय स्तर पर पनपाकर जहॉं एक ओर श्रमिक पलायन को रोकने में मदद मिलती है वही आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ ही परम्परागत कलाओं को पुनर्जिवित कर ग्राम्य समृद्धि देखने को मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर कुटीर कला का देश की आर्थिक विकास दर में बहुत बडा योगदान है। साथ ही हम स्वनिर्मित वस्तुओं पर गर्व कर सकते है और उनको प्रोत्साहित कर सकते है।
खेतडी स्थित रामकृष्ण मिशन जन सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। शिक्षा, नेत्र जांच व निदान, संस्कार संवर्धन, राहत कार्य और महिला स्वावलम्बन और सशक्तिकरण को नई पहचान दी है। इसी दिशा में आत्मनिर्भर भारत के लिये स्थानीय स्तर पर परम्परागत कुटीर कला कों संरक्षित करने कि साथ ही उसके विकास के लिए एक कदम बढाते हुये ऐसी ही एक अनूठी पहल के तहत रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द स्मृति मंदिर खेतडी द्वारा मॉं सारदा क्षेत्रीय विकास प्रकल्प का शुभारम्भ किया गया । प्रकल्प में स्थानीय जरूरतमंद ग्रामीण/शहरी महिलाओं के समूह को दक्ष प्रशिक्षकों के द्वारा कुटीर कला का निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
इसके वर्तमान में खेतड़ी का एक केन्द्र संचालित है जहॉं पर स्कूल बैग,पर्स, कैरी बैग,बोटल बैग, दस्तावेज फोल्डर इत्यादि लगभग बीस से अधिक प्रकार की उपयोगी वस्तुओं को कच्चे माल जूट, कपडा, सूती यार्न आदि पूर्णतः स्वदेशी पदार्थो के उपयोग से आकर्षक व गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किये जाते है। तैयार माल को अजीत विवेक संग्रहालय परिसर में स्थित प्रदर्शन कक्ष में पर्यटकों हेतु रखा जाता है। संग्रहालय में आने वाले देशी, विदेशी सैलानी इनसे आकर्षित होकर इनका क्रय करते है। जिसका मूल्य बहुत सामान्य है। प्राप्त आय का उपयोग कामगार महिलाओं में वितरित किया जाता है जिससें महिलाओं की प्रसन्नता देखते ही बनती है। महिलाये अपने धरेलू कार्य से निवृत होकर केन्द्रो पर कार्य करती है जिससें आय के साथ ही धरेलू कार्य भी बाधित नही होते।
रामकृष्ण मिशन, ने एक वर्ष पूर्व ही आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को पहचाना
इस सम्बंध में रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी आत्मनिष्ठानन्द ने बताया कि इस प्रकल्प का आरम्भ एक वर्ष पूर्व ही कर दिया गया था जिसका उद्धेश्य महिलाओं के सशक्तिकरण ,आर्थिक स्वावलम्बन के साथ ही स्थानीय स्तर पर पहचान खोती कुटीर उद्योग कला को पुनर्जीवित करना तथा स्थानीय विकास के लिये रोजगार सृजन करना है। परम्परागत कलाओं, कुटीर उद्योगों का गुणवत्तपूर्ण विकास करके रोजगार सृजन की विपुल सम्भावनाए है। प्रकल्प में प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है। उत्पाद तैयार करने के लिये आवश्यक उपकरण भी उपलब्द्व करवाये जाते है। भविष्य में इसको ओर विकसित करने की योजना भी है।
विगत चालीस वर्षो से चल रहा है महिला सिलाई केन्द्र-
मिशन के केन्द्र द्वारा खेतड़ी के आस पास के गॉंवों में मॉ सारदा सिलाई केन्द्र भी चलाये जा रहे है जिनमें बडी संख्या में महिलाये, छात्राये निःशुल्क सिलाई पशिक्षण प्राप्त कर रही है सफल प्रशिक्षण के उपरान्त उनको सिलाई मशीन भी प्रदान की जाती है । इसके द्वारा महिलाये स्वतः रोजगार का सृजन करके आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रही है। इस वर्ष तक हजारों महिलाओं को सिलाई मशीनों का निःशुल्क वितरित किया गया है।