मंढोली में खनन के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश, रैली निकाल सौंपा ज्ञापन
हरीश देवेंदा
नीमकाथाना (नवयत्न)। निकटवर्ती ग्राम मंढोली में खनन पट्टा संख्या 60 को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खेतड़ी मोड़ से उपखंड कार्यालय तक आक्रोश रैली निकालकर एसडीएम राजवीर यादव को ज्ञापन सौंपा और प्रस्तावित खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

रैली के दौरान ग्रामीणों ने “पहाड़ बचाओ-गांव बचाओ”, “खनन से होता है प्रदूषण भारी, रोक दो ये लूट, बचाओ धरती हमारी” जैसे नारों के साथ विरोध जताया।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में बताया कि खनन पट्टा संख्या 58, 59, 60 एवं 61 ग्राम पंचायत मंढोली की चरागाह भूमि एवं आबादी क्षेत्र के समीप प्रस्तावित हैं, जहां वर्षों से ग्रामीणों और पशुपालकों का पारंपरिक उपयोग होता आ रहा है।
इससे पहले आयोजित महापंचायत में ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि गांव की पहाड़ी पर किसी भी कीमत पर खनन नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी पर चार से पांच धार्मिक मंदिर स्थित हैं, जिनकी आस्था से पूरा गांव जुड़ा हुआ है।
सरपंच विमला देवी ने बताया कि खनन होने की स्थिति में मंदिरों को नुकसान पहुंच सकता है, वहीं पहाड़ी के आसपास बसे 100 से अधिक मकानों पर भी खतरा मंडरा जाएगा।
सरपंच प्रतिनिधि मुरारी यादव ने बताया कि खनन पट्टे के विरोध में गांव-गांव जनसंपर्क और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरणीय स्वीकृति तत्काल निरस्त कर खनन पट्टा रद्द किया जाए।
ग्रामीण सुरेश शर्मा ने कहा कि यदि पहाड़ी को खनन के लिए आवंटित किया गया तो पूरा गांव उजड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी हाल में पहाड़ को नष्ट नहीं होने देंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियों से धार्मिक आस्था प्रभावित होगी, साथ ही धूल, शोर और भारी मशीनों के संचालन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) में गांव की वास्तविक आबादी, चरागाह भूमि, पशुधन निर्भरता और सामूहिक पर्यावरणीय प्रभाव का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रस्तावित खनन परियोजना की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच करवाई जाए तथा जांच पूरी होने तक सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। इस दौरान सैकड़ों महिला पुरुष मौके पर मौजूद रहे।