95 साल बाद रक्षाबंधन पर बनेगा दुर्लभ महासंयोग: पूरे दिन नहीं रहेगी भद्रा की बाधा

दिनेश कुमार सैनी

जयपुर (नवयत्न)। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के साथ मनाया जाएगा।

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार करीब 95 वर्षों बाद ऐसा अवसर आया है, जब रक्षाबंधन का पूरा दिन भद्रा के प्रभाव से मुक्त रहेगा। इससे बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन परंपरा में भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। सामान्यतः रक्षाबंधन पर भद्रा के कारण शुभ मुहूर्त सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, लेकिन इस बार पूरे दिन भद्रा नहीं रहने से श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार शुभ मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांध सकेंगे।

शर्मा का कहना है कि इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 1930 में बना था। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से प्रारंभ होगी, जिसके साथ ही रक्षाबंधन पर्व का शुभारंभ माना जाएगा। हालांकि पूरा दिन भद्रा से मुक्त रहेगा, फिर भी शुभ कार्यों के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तथा दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

शर्मा ने सलाह दी है कि सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए।

धर्माचार्यों के अनुसार भद्रा रहित यह रक्षाबंधन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जा रहा है। इससे देशभर में करोड़ों परिवार बिना किसी समय संबंधी असमंजस के पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ पर्व मना सकेंगे। इस बार मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, राखी उत्सव और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां भी विशेष रूप से की जा रही हैं। वहीं बाजारों में राखियों, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी को लेकर उत्साह चरम पर रहने की संभावना है।

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगी, जबकि भाई जीवन भर उनकी रक्षा और सम्मान का संकल्प लेंगे। 95 वर्षों बाद बना यह भद्रा-मुक्त महासंयोग इस बार के रक्षाबंधन को यादगार और विशेष बनाने जा रहा है।

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