भूमाफियाओ द्वारा पुरातत्त्व शिलालेख को हटाने का आरोप-दिया ज्ञापन
नवरतन वर्मा
रतनगढ़ (नवयत्न)। रतनगढ़ में नगर सेठ कहे जाने वाले जालान परिवार के पुरखो द्वारा सैकड़ो वर्ष पूर्व अपने कुटुंब के नाम को अमर रखने की सोच से शहर परकोटे के भीतर अशोक स्तम्भ के पास हनुमान भंडार के नाम से एक संस्था स्थापित की थी, जिसमे कस्बे के वाशिदो के अगर मांगलिक व सुख दु:ख से जुडा कोई कार्यों बाबत होने वाले आयोजन मे उपयोग मे आने वाले बर्तन व अन्य सामग्री रखते हुये एक विशाल भंडार भवन का निर्माण करवाकर उसमे क्षेत्र के वासियो के लिए बर्तनो सहित आयोजनों के तहत काम मे आने वाली सभी वस्तु, एक ही छत के नीचे मिलती थी। हनुमान वस्तु भंडार किसी वक्त शहर का आज के समय का कहे तो विशाल टेंट केटरिग हाउस था जिसमे मिलने वाले सामान का उपयोग वाशिंदे करते थे। आज से लगभग 20-25 वर्षो पूर्व जालान परिवार द्वारा इस हनुमान भंडार का संचालन कैसे जैसे किया जा रहा था। समय का चक्र के साथ जमीनो को कीमत भी आसमान छूने लगी। वही जालान परिवार की बदली पीढी के वरिसानो ने परिवार की जमीने व भवनो को बेचने का सिलसिला भी प्रारम्भ कर दिया और शने: शने: इस परिवार की पुरतत्त्व इतिहास को बया करती अनेको सम्पति बिक गई परन्तु हनुमान भंडार के भवन को तोड़ का इसका कुछ हिस्सा नवीनकरण की आड़ मे दुकानों की शक्ल मे बदला गया और शने शने एक एक करके दुकाने भी बिक गई। वही दूसरी और हनुमान भंडार के ऊपरी तल पर लगा सार्वजनिक हित का लगा एक शिलालेख जिसमे यह भवन किस वर्ष किस कार्य बाबत बना था अंकित था और गत वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार के समय पुरे प्रदेश मे पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वें करके पुरानी हवेलियो, भवनो, छत्रियों आदि का रिकॉर्ड संधारण हुआ था। जिसमे सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार हनुमान वस्तु भंडार भी सर्वें लिस्ट मे शामिल हुआ था। उक्त पुरातत्व धरोहर के नाम निशान को खुर्दबुर्द कर वर्तमान मे इस कीमती भूमि को विक्रय करने की नीयत से जालान परिवार व उनके प्रतिनिधि द्वारा भूमाफियाओ के साथ मिलकर गुरुवार रात्रि को इस भवन पर लगा प्राचीन शिलालेख को तोड़ फोड़ कर हटा दिया गया। संचालित दुकानों के मालिकों को इस घटना का पता लगा तो सभी ने मिलकर उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन देकर हुई घटना की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग करते हुये ज्ञापन मे बताया की जब हमारे द्वारा इसका विरोध किया गया तो जालान परिवार के प्रतिनिधि द्वारा गेंगस्टर व भूमाफियाओ द्वारा हमें डराया धमकाया गया है। ज्ञापन मे गायब हुये शिलालेख को बरामद कर उसे पुन: उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग की। दिए ज्ञापन पर महेंद्र, हरीश, विकास, राकेश, विमल सहित दर्जनों व्यापारियों के हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज करवाया। ज्ञापन की प्रतिलिपि देवस्थान विभाग के सचिवए संभागीय आयुक्त बीकानेर व जिला कलेक्टर चूरू को भी प्रेषित की गई है।