बरसों बाद पीहर पहुंचीं बहन-बेटियां

महेंद्र खडोलीय 

श्रीमाधोपुर (नवयत्न)। ग्राम लिसाड़िया में 6 एवं 7 जून को आयोजित दो दिवसीय उदयभान शेखावत बाईसा राज स्नेह मिलन समारोह का शनिवार को शुभारंभ हुआ। समारोह में राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से आई विवाहित बहन-बेटियों का पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। वर्षों बाद अपने पीहर, गांव और बचपन की सहेलियों से मिलकर कई महिलाओं की आंखें नम हो गईं, वहीं पुरानी यादों और हंसी-ठिठोली के बीच पूरे परिसर में भावनाओं और अपनत्व का अनूठा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद महिलाओं ने आपसी परिचय, संवाद और स्मृतियों को साझा करते हुए पुराने रिश्तों को फिर से जीवंत किया। कई प्रतिभागियों ने बताया कि वर्षों बाद अपने गांव और बचपन के साथियों से मिलना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा।

समारोह में समाज के प्रबुद्धजन, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस दौरान महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण तथा समाज की बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की बेटियों को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

आयोजकों ने बताया कि बदलते दौर में पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियों को कम करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से इस स्नेह मिलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन केवल मेल-मिलाप का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बन रहा है।

आयोजन के दौरान हुए बौद्धिक संवाद समाज की वर्तमान परिस्थितियों और चुनौतियों पर आधारित रहे। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से दूसरी और तीसरी पीढ़ी की वे महिलाएं, जो विशेष अवसरों पर ही अपने गांव आ पाती हैं, उन्हें एक मंच पर एकत्रित होने और अपने गांव, परिवार तथा पुरानी यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर विवाह के बाद रहने वाली महिलाओं के बीच पुनः संवाद स्थापित होता है और सामाजिक रिश्तों की डोर और अधिक मजबूत बनती है।दो दिवसीय समारोह के दौरान सामाजिक संवाद, पारंपरिक राजस्थानी भोजन, भजन संध्या, देव दर्शन, ग्राम भ्रमण, महिला प्रतिभा एवं खेल प्रतियोगिताओं के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने राजस्थानी लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।सम्मेलन में उपस्थित लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन रिश्तों में नई ऊर्जा भरने के साथ समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं। पूरे आयोजन में रिश्तों की गर्माहट, अपनत्व की मिठास, सामाजिक सरोकारों की चिंता और राजस्थानी संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली।

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