पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या पर लोहार्गल सूर्यकुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब
निसं
सीकर (नवयत्न)। पुरुषोत्तम मास में आई पावन सोमवती अमावस्या के अवसर पर लोहार्गल स्थित पवित्र सूर्यकुंड में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही लाखों श्रद्धालु सूर्यकुंड पहुंचने लगे और विधि-विधान से स्नान कर भगवान सूर्यनारायण के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की तथा मंदिर परिसर में नारियल बांधकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं।
श्रीमद् जगतगुरु श्री रामानुजाचार्य लोहार्गल सूर्य मठ मंदिर सूर्यकुंड पीठाधीश्वर महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का सनातन धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। वहीं पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं मांगलिक दोष निवारण की विशेष पूजाएं भी दो दिनों तक निरंतर चलती रहीं।
महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि अधिक मास, जिसे शास्त्रों में पुरुषोत्तम मास कहा गया है, आत्मशुद्धि, साधना, भक्ति और लोककल्याण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या पर स्नान, जप, तप, दान और पितृ तर्पण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को सेवा, संस्कार और सदाचार की प्रेरणा देने वाले अवसर हैं। आज के भौतिकवादी युग में ऐसे पर्व व्यक्ति को अपनी संस्कृति, परिवार और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर गौसेवा, वृक्षारोपण, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे लोककल्याणकारी कार्यों का संकल्प लेने का भी आह्वान किया गया।
दिनभर सूर्यकुंड और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रही। भक्तों ने भगवान सूर्यनारायण एवं देवालय में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन कर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
उपशीर्षक:
“आत्मशुद्धि, पितृ तर्पण और सनातन संस्कृति के संदेश के साथ संपन्न हुआ लोहार्गल का भव्य धार्मिक आयोजन”