‘डॉक्टर और मंत्री कौन?’ जवाब लेने सीधे एसीबी मुख्यालय पहुंचे किरोड़ी मीणा

निसं 

जयपुर (नवयत्न)। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मुख्यालय पहुंचकर बीज निगम के तत्कालीन स्वतंत्र निदेशक जुगल किशोर की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एफआईआर में ‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ शब्दों का उल्लेख किया गया है, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने एसीबी से स्पष्ट करने की मांग की कि एफआईआर में उल्लेखित डॉक्टर और मंत्री कौन हैं, अन्यथा यदि वे दोषी हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार शाम करीब सवा चार बजे एसीबी मुख्यालय पहुंचे। उस समय एसीबी महानिदेशक कार्यालय में मौजूद नहीं थे, जिसके कारण उन्हें कुछ समय इंतजार करना पड़ा। बाद में उन्होंने एसीबी डीजी को तीन लिखित पत्र सौंपे और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसका मजमून लीक कर वायरल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि चूंकि वे स्वयं डॉक्टर भी हैं और मंत्री भी, इसलिए इस प्रकार की जानकारी सार्वजनिक होने से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में उनका कोई दोष सिद्ध होता है तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए, लेकिन यदि उनका नाम केवल भ्रम या राजनीतिक कारणों से जोड़ा जा रहा है तो एसीबी को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कथित ‘नकली बीज घूस कांड’ में मंत्री की भूमिका की जांच की मांग की है, जबकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि विभाग के जरिए धन संग्रह के आरोप लगाए हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने भी मंत्री पर सवाल उठाए हैं।

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए किरोड़ी मीणा ने कहा कि यदि डोटासरा के पास कोई प्रमाण हैं तो सार्वजनिक करें, अन्यथा वे उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान डीओआईटी, जल जीवन मिशन (जेजेएम) और खाद्य विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के अनेक मामलों की शिकायतें उन्होंने एसीबी को दी थीं, लेकिन उन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि एसीबी किसी दबाव में काम कर रही है और जांच एजेंसी को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी मर्यादा और “लक्ष्मण रेखा” का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने एसीबी अधिकारियों से निष्पक्षता के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताई।

डॉ. मीणा ने राजस्थान स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि निगम के अध्यक्ष की ओर से एसीबी को सात पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन वर्ष 2024 से मामला केवल प्राथमिक जांच के स्तर पर लंबित है।

इसके अलावा उन्होंने करौली जिले की मंडरायल क्षेत्र की रामपुर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पंचायत में लगभग 28 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत हुए थे, लेकिन शिकायतों के अनुसार करीब 26 करोड़ रुपये के खर्च में गड़बड़ी हुई और वास्तविक कार्य बहुत कम हुए। इसके बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

एसीबी मुख्यालय से बाहर आने के बाद किरोड़ी मीणा ने कहा कि एसीबी डीजी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जांच अधिकारी जल्द ही स्पष्ट करेगा कि मामले में उल्लेखित ‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ कौन हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण को अपने खिलाफ रचा गया षड्यंत्र बताते हुए कहा कि इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को भी दी जाएगी तथा मामले की जांच किसी सिटिंग जज से कराने की मांग की जाएगी।

उन्होंने दोहराया कि यदि उनके खिलाफ कोई सबूत है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन बिना तथ्यों के उनका नाम उछालकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

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