25 साल से जलभराव का अभिशाप: एक मासूम की जान गई, करोड़ों का नुकसान हुआ, फिर भी प्रशासन मौन 

 

सुरेंद्र शर्मा 

सीकर (नवयत्न)। राजस्थान की शिक्षा नगरी सीकर का सबसे व्यस्त मार्ग नवलगढ़ रोड–पिपराली रोड पिछले 25 वर्षों से जलभराव, दलदल और गंदगी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हजारों छात्र-छात्राएं, व्यापारी और आमजन हर साल इस परेशानी का सामना करते हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

 

सबसे दुखद पहलू यह है कि पिछले वर्ष इसी जलभराव में पैर फिसलने से पढ़ाई के लिए सीकर आए एक नाबालिग छात्र की डूबकर दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी। हर वर्ष सैकड़ों राहगीर, छात्र-छात्राएं और वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। बारिश के दिनों में बच्चों की पढ़ाई तक बाधित हो जाती है और कोचिंग तक पहुंचना जोखिम भरा बन जाता है।

 

पिछले 25 वर्षों में हजारों वाहनों के इंजन सीज हो चुके हैं, जबकि व्यापारियों और आमजन को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। आसपास की दुकानों में कई-कई फीट तक पानी भर जाता है, जिससे लाखों रुपये का सामान खराब हो जाता है और जान-माल दोनों का खतरा बना रहता है।

 

हाल ही में सफाई के नाम पर नाले और चैंबर खुले छोड़ दिए गए, जिनमें दो बुजुर्ग गिर गए। स्थानीय लोगों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें बाहर निकाला। यह घटना प्रशासन की लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

 

बारिश का पानी उतरने के बाद नवलगढ़ रोड और पिपराली रोड से बहकर आया कीचड़, मलबा और दलदल नवलगढ़ पुलिया के पास जमा रहता है, लेकिन प्रशासन इसकी नियमित सफाई तक सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। दूसरी ओर पुलिस थाने की तरफ सड़क को ढाई से तीन फीट ऊंचा बना दिया गया, जबकि व्यापारियों की ओर जाने वाला मार्ग करीब तीन फीट नीचे रह गया। नतीजा यह है कि सारा पानी, कीचड़ और गंदगी व्यापारिक क्षेत्र में जमा हो जाती है, जिससे हर दिन विद्यार्थी, बुजुर्ग और स्थानीय लोग परेशान होते हैं।

 

इस समस्या के विरोध में पिछले वर्ष स्थानीय व्यापारियों ने लगातार 85 दिनों तक धरना दिया था। आंदोलन के बाद सरकार ने 13 करोड़ रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी। उस समय नेताओं और मंत्रियों ने दावा किया था कि अब यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और लोगों की “पीढ़ियों का काम हो गया”। लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो निर्माण कार्य पूरा हुआ और न ही जनता को राहत मिली।

 

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने कई बार जिला कलेक्टर, नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिले। चुनाव के समय यह मुद्दा बड़े-बड़े भाषणों और वादों में जरूर दिखाई देता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता की पीड़ा और जलभराव दोनों को भुला दिया जाता है।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन आमजन की समस्याओं पर आंखें मूंदकर बैठा है? क्या व्यवस्था केवल वीआईपी सड़कों को चमकाने तक सीमित रह गई है? शिक्षा नगरी का सबसे व्यस्त विद्यार्थी मार्ग वर्षों से बदहाल है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि समाधान के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं।

 

अब सवाल जनता का है—25 साल से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा? क्या प्रशासन किसी और हादसे का इंतजार कर रहा है?

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