आचार्य महाश्रमण ने युवाचार्य की घोषणा की

अबूबकर बल्खी
लाडनूँ (नवयत्न)। जैन विश्व भारती में विराजित युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण ने ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ की सम्पन्नता के अवसर पर तेरापंथ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए युवाचार्य के रूप में मुख्य मुनिश्री महावीर कुमार को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। आचार्यश्री की इस घोषणा के साथ ही पूरा प्रवचन पण्डाल जयघोष से गूंज उठा। आचार्यश्री ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी व आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने मुझ पर ध्यान देकर यह दायित्व सौंपा जिसे मैं अब तक निभाता आ रहा हूं। आज मैंने तेरापंथ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने उत्तराधिकारी के रूप में मुनि महावीर कुमार की घोषणा की है। आचार्यश्री ने कहा कि आचार्य का यह दायित्व है कि वर्तमान के साथ भविष्य की व्यवस्था पर भी ध्यान दे। मैं उस परंपरा का निर्वाह करते हुए अपने उत्तराधिकारी के रूप में  युवाचार्य पद पर मुनि महावीर कुमार को नियुक्त करता हूं। आचार्यश्री ने परंपरा अनुसार नवनियुक्त युवाचार्य मुनि महावीरकुमार को अपने हाथों से अपनी सफेद चद्दर ओढ़ाकर भिक्षु परंपरा को आगे बढ़ाया।
गौरतलब रहे कि करीब 250 वर्ष पूर्व भिक्षु स्वामी ने जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना की थी और उन्होंने अपने युवाचार्य के रूप में आचार्यश्री भारमल को चुना। इस प्रकार तेरापंथ धर्मसंघ में यह परंपरा चली कि आचार्य अपने भावी उत्तराधिकारी का युवाचार्य के रूप में घोषित करता है। वही युवाचार्य आगे चलकर तेरापंथ धर्मसंघ का नेतृत्व करता है। वर्तमान में यह परंपरा ग्यारहवें आचार्यश्री महाश्रमण के साथ चल रही है। इसके साथ ही अब मुनि महावीर कुमार को 12वा उतराधिकारी बनने का गौरव मिला है।
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