नोखा में सीपीआईएम का दबदबा, 45 में 29 वार्ड जीते, भाजपा 13 पर सिमटी, 3 निर्दलीय जीते
श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न)। नगरपालिका चुनाव के नतीजों ने नोखा की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। 45 वार्डों के परिणाम सामने आने के बाद सीपीआईएम ने 29 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि भाजपा 13 सीटों पर सिमट गई। वहीं तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। मजे की बात ये भी रही की राजस्थान मे नोखा पालिका चुनाव मे कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार तक नहीं उतारे। स्पष्ट बहुमत के बाद अब नगरपालिका में बोर्ड गठन का रास्ता लगभग साफ हो गया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पालिकाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है।
नतीजे आते ही सड़कों पर उतरा जीत का जश्न
परिणाम घोषित होते ही सीपीआईएम के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शहर में जगह-जगह आतिशबाजी की गई। समर्थकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और मिठाइयां बांटकर जीत का जश्न मनाया। कई स्थानों पर विजयी प्रत्याशियों का फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। सीपीआईएम के विजयी प्रत्याशी एवं समर्थक जुलूस के रूप में शहर में निकले। ढोल-नगाड़ों के बीच कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। देर तक शहर में जीत का उत्साह दिखाई दिया। कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि यह जीत नोखा की जनता के विश्वास और विकास की उम्मीदों की जीत है।
कई दिग्गजों को जनता ने दिया झटका
चुनाव परिणामों में भाजपा के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष गंगाराम पारीक चुनाव हार गए। वहीं पूर्व पालिकाध्यक्ष निर्मल भूरा को भी पराजय झेलनी पड़ी। हालांकि उनकी पत्नी जयश्री भूरा भाजपा के टिकट पर 42 वोटों से जीतने में सफल रहीं।
झंवर परिवार का वर्चस्व कायम
चुनाव में झंवर परिवार का प्रभाव दोनों खेमों में दिखाई दिया। पूर्व संसदीय सचिव कन्हैयालाल झंवर के पुत्र नारायण झंवर और पुत्रवधू संतोष झंवर सीपीआईएम के टिकट पर विजयी रहे। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीनिवास झंवर के पुत्र महेश झंवर ने भी जीत दर्ज की।
एक-एक वोट ने बदली कई वार्डों की तस्वीर
कई वार्डों में जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा। सीपीआईएम की मुन्नी देवी वार्ड 35 में महज एक वोट से विजयी रहीं। वहीं भाजपा की परमा देवी वार्ड 21 में सिर्फ दो वोटों से जीतीं। पूर्व पालिकाध्यक्ष मंजू देवी पंचारिया 12 वोटों से तथा वार्ड 2 से भाजपा की रेणुका 24 वोटों से विजयी हुईं। निर्मल भूरा 98 वोटों से चुनाव हार गए, जबकि उनकी पत्नी जयश्री भूरा ने 42 वोटों से जीत दर्ज की। वार्ड 28 में सीमा सुधार की 90 वोटों से जीत भी चर्चा में रही। उनके सामने भाजपा के कद्दावर नेता मोडाराम सीवर की पुत्रवधू चुनाव मैदान में थीं।
जनता के बीच सक्रिय रहने वालों को मिला समर्थन
नतीजों ने स्थानीय राजनीति में यह संदेश भी दिया कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने वाले प्रत्याशियों को फायदा मिला। वार्ड 23 में सीपीआईएम के देवकिशन चांडक ने भाजपा के पूर्व पालिकाध्यक्ष निर्मल भूरा को मात दी। वार्ड 40 से जगदीश मांजू, वार्ड 39 से ओमप्रकाश देडू, वार्ड 37 से नारायण झंवर, वार्ड 9 से दिनेश सुथार, वार्ड 33 से निर्दलीय आरिफ और वार्ड 10 से निर्दलीय चेनाराम की जीत ने भी स्थानीय चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया। चुनाव में मुकाबले की नजदीकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि 17 पार्षद 50 से कम वोटों के अंतर से जीते, जबकि 9 पार्षदों की जीत का अंतर 100 वोटों से कम रहा।
ओबीसी आरक्षण ने बढ़ाई अध्यक्ष पद की हलचल
इस बार नोखा नगरपालिका अध्यक्ष का पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में चुनाव परिणामों के साथ ही अब अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है। सीपीआईएम को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब चर्चा इस बात की है, कि ओबीसी वर्ग से निर्वाचित पार्षदों में से किस चेहरे पर अध्यक्ष पद के लिए दांव लगाया जाएगा। समर्थक अपने-अपने पसंदीदा नामों को लेकर चर्चाएं कर रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला सीपीआईएम नेतृत्व और निर्वाचित पार्षदों की राय के बाद ही सामने आएगा। अध्यक्ष पद को लेकर संभावित दावेदारों के नामों पर राजनीतिक जानकारों और समर्थकों के बीच चर्चा शुरू हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में नोखा की राजनीति में बैठकों और रणनीतिक गतिविधियों का दौर और तेज होने की संभावना है।
बीकानेर रवाना हुए कन्हैयालाल झंवर
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद सीपीआईएम के प्रमुख नेता कन्हैयालाल झंवर बीकानेर के लिए रवाना हो गए। उनके बीकानेर रवाना होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं। अब सभी की निगाहें आगामी बोर्ड गठन और अध्यक्ष पद के चयन पर टिकी हैं। विजेता प्रत्याशियों को रिटर्निंग अधिकारी की ओर से निर्वाचन प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र मिलने के साथ ही निर्वाचित पार्षदों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई।
जनादेश के बाद अब जिम्मेदारी की परीक्षा
चुनाव प्रचार के दौरान शहर में विकास, सड़क, सफाई, पानी, रोशनी और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए थे। अब चुनाव परिणाम के बाद इन मुद्दों पर जनता की नजर नई नगरपालिका पर रहेगी। सीपीआईएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव में मिले जनादेश को शहर के विकास में बदलने की होगी। जनता ने जिस विश्वास के साथ स्पष्ट बहुमत दिया है, उस विश्वास पर खरा उतरना अब नई नगरपालिका बोर्ड की जिम्मेदारी होगी।
भाजपा के लिए आत्ममंथन का समय
दूसरी ओर, भाजपा के लिए 13 सीटों का आंकड़ा निश्चित रूप से आत्ममंथन का विषय है। स्थानीय स्तर पर सीमांकन को लेकर उठे सवाल, शहर में विकास कार्यों की स्थिति और चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा में रहे। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद नोखा नगरपालिका में स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाना पार्टी के स्थानीय संगठन के लिए चुनौती माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को नोखा में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों पर काम करने की जरूरत होगी।
नोखा की राजनीति का नया अध्याय शुरू
फिलहाल नगरपालिका चुनाव का मुकाबला खत्म हो चुका है, लेकिन नोखा की राजनीति का अगला अध्याय शुरू हो गया है। 29 पार्षदों के साथ सीपीआईएम मजबूत स्थिति में है और समर्थक जीत के जश्न में डूबे हैं। दूसरी ओर, ओबीसी आरक्षित अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि पालिकाध्यक्ष कौन बनेगा, बल्कि यह भी है, कि नई नगरपालिका जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। चुनाव में मिले स्पष्ट जनादेश के बाद नोखा की जनता की निगाहें अब बोर्ड गठन, अध्यक्ष के चयन और शहर में होने वाले विकास कार्यों पर टिकी हैं।