दो संतों के बीच हुए झगड़े के दौरान एक की मौत मामले में समाधि से निकाला शव, हत्या का मामला दर्ज
नवरतन वर्मा
रतनगढ़ (नवयत्न)। तहसील के ग्राम सांगासर में दो संतों के बीच हुए झगड़े के बाद एक संत की हुई मौत मामले में गुरुवार को करीब 50 घंटे बाद शव को समाधि से बाहर निकालकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। उक्त घटना को लेकर बुधवार को बवाल भी मच गया था तथा आक्रोशित लोगों ने सालासर सड़क मार्ग को जाम कर दिया था। मौके पर पहुंची पुलिस ने करीब एक घंटे की समझाइश के बाद आवागमन को दुरुस्त करवाया गया। मामले के अनुसार हरियाणा के सिरसा जिले के गांव धौलपालिया निवासी हंसराज पुत्र मोहनलाल ने बुधवार की पुलिस को दी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि उसका छोटा भाई बन्नानाथ वर्ष 2004 में संन्यास लेकर साधु बन गया था तथा दो वर्षों से रावतसर में बालकनाथ के आश्रम में रह रहा था। 30 सितंबर को बन्नानाथ गांव आया था। इसी दौरान दो अक्टूबर को उन्हें बालकनाथ का फोन आया तथा सत्संग में चलने के लिए कहा, जिस पर वह तीन अक्टूबर को रावतसर आ गया। चार अक्टूबर को पता चला कि बालकनाथ उसके भाई को रतनगढ़ तहसील के ग्राम सांगासर स्थित बजरंगनाथ के पास छोड़कर आ गया और एक सप्ताह बाद पुन: उसे लेने आएगा। इसके बाद बन्नानाथ से कोई संपर्क नहीं हुआ। जब इस संबंध में बालकनाथ से बात की, तो उसने संतोषप्रद जबाब नहीं दिया। जब जानकारी की तो पता चला कि उसके भाई का बालकनाथ के साथ झगड़ा हुआ है और उसकी मृत्यु हो गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि बन्नानाथ के साथ मारपीट कर उसकी हत्या कर दी तथा सबूत छिपाने के लिए इन लोगों ने उसे बिना किसी की जानकारी के समाधि दे दी। पुलिस ने बालकनाथ, बजरंगनाथ, मुकेशनाथ, लूणनाथ, लक्ष्मीनारायण एवं अन्य अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। प्रकरण में उपखंड मजिस्ट्रेट के आदेश एवं तहसीलदार अंकित मिमानी के निर्देशन में मेडिकल एवं एफएसएल टीम की मौजूदगी में शव को तीन दिनों बाद समाधि से निकालकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जहां पर पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। इस दौरान सीआई संदीप कुमार सहित पुलिस जाब्ता तैनात रहा। वहीं मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई।