तुलसी का धार्मिक ही नहीं औषधीय महत्त्व भी

पर्यावरण प्रेमी गोपाल शर्मा ने 651 तुलसी के पौधे वन-विभाग को किए सुपुर्द

खेतड़ी,(जयंत खाँखरा)24 मई। तुलसी का धार्मिक ही नहीं औषधीय महत्त्व भी है, हमारे देश में प्रत्येक धार्मिक आयोजन में तुलसी का प्रयोग होता है इसके अतिरिक्त आयुर्वेद की अलग-अलग बीमारियों में तुलसी को औषधि के रूप में भी काम में लिया जाता है। तुलसी में पारा होता है तथा तुलसी एंटीबायोटिक भी है तुलसी को हमारे देश में विष्णु प्रिया व वृंदा के रूप में भी जाना जाता है।

उक्त बात पर्यावरण प्रेमी गोपालकृष्ण शर्मा द्वारा तैयार तुलसी व अल्डूसा के पौधो के रविवार को मुख्यमंत्री जनआवास केन्द्र स्थित सामुदायिक भवन में वनविभाग को भेंट करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए ब्लाक आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ कमलेश कुमार शर्मा ने कहे।

समारोह में उपखण्ड अधिकारी शिवपाल जाट, न्यायिक मजिस्ट्रेट मनेन्द्र शर्मा, खण्ड मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ हरीश यादव, क्षेत्रीय वन अधिकारी विजय कुमार फगेड़िया, अधिशासी अधिकारी उदयसिंह, नायब तहसीलदार अन्नू शर्मा, डॉ महेन्द्र सैनी को एक-एक तुलसी का पौधा भेंट किया गया। संचालन रमाकांत वर्मा ने किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में पर्यावरण प्रेमी गोपाल कृष्ण शर्मा ने कहा कि मैं गत 44 वर्षों से बरगद और पीपल के पौधे तथा 4 वर्षों से तुलसी के पौधे तैयार कर लोगों में नि:शुल्क वितरित करता हूं। इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना के चलते चल रहे लॉक डाउन की पालना के कारण सार्वजनिक वितरण नहीं हो सका। इस कारण सोशल डिस्टेंस की पालना करते हुए 651 तुलसी के व 15 औषधीय पौधे अल्डूसा के वन विभाग को भेंट किए गए। इन पौधों का वितरण अब वन विभाग करेगा।

इस अवसर पर अतिथियों ने गोपालकृष्ण शर्मा द्वारा तैयार 651 तुलसी व 15 अल्डूसा के पौधे वन-विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी विजय कुमार फगेड़िया को भेंट किए। इस अवसर पर अनिल कुमार, महीपाल सिंह रणवा, कृष्ण सिंह, सत्यप्रकाश शर्मा, दिनेश कुमार नायक, धर्मपाल बीलवा मौजूद थे।

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