हमारी संस्कृति में पशु—पक्षियों की सेवा का भाव
चूरू (दैनिक नवयत्न ) । देश सरकार की पंच गौरव योजना अंतर्गत जिले में ‘एक जिला – एक प्रजाति : खेजड़ी’ के संरक्षण संवर्धन और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में जिले के तालछापर वन्य जीव अभयारण्य में रविवार को तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का आगाज हुआ। इस अवसर पर रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, केसी मालू, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की तथा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गणेश वंदना के साथ गतिविधियों का आगाज हुआ।
रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने कहा कि विकास के साथ हम अपनी जड़ों से जुड़ें तथा पक्षी व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षियों व वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशु—पक्षियों की सेवा का भाव हमारी संस्कृति में है। हम दैनिक गतिविधियों में पक्षियों व पर्यावरण से जुड़े हैं। हमें पशु—पक्षियों की दुनिया को देखें, सीखे और जुड़ें तथा संकल्पित प्रयासों से वन क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास करें।
चूरू विधायक हरलाल सहारण ने कहा कि ‘सिर साटै रुंख़ रहे तो भी सस्तो जाण’ के संकल्प से हम प्रेरणा लें और दैनिक जीवन में प्रकृति व पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लें। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण से हमें पेड़ ही बचा सकते हैं। हम अपनी सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को बचाएं।
उन्होंने कहा कि चूरू जिले में कोड चूरू, पुस्तक संवाद आदि विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। इन्हीं नवाचारों के साथ पक्षी उत्सव का आयोजन भी क्षेत्रीय विशेषताओं के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने कहा कि प्रकृति में हर चीज का उपयोग और महत्व है। मशीन युग आने से प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ हुआ है। हम स्वयं से संकल्प लें और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम करें। पर्यावरण संतुलन के लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और आने वाली पीढ़ी को प्रकृति से जोड़कर पर्यावरणीय संतुलन की आदतों का विकास करें।
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा कि चूरू का ताल छपर वन्यजीव अभयारण्य विश्व की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संजोए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सकारात्मक पहल है और इसमें स्थानीय लोगों की समुचित भागीदारी हो। ताल छापर व यहां मौजूद जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए यहां के लोगों को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। हम सभी प्रकृति व पर्यावरण से जुड़े और हमारी प्राकृतिक विरासत को सहेजें।
उन्होंने कहा कि ताल छापर के नजदीक जसवतंगढ़ में वेटलैंड डवलप किया गया है। इससे वहां भी जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है।
पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। मनुष्य जलचर, नभचर और थलचर सभी का संरक्षण करें। हम जीव हत्या रोकथाम का संकल्प लें और जीव— जंतुओं का संरक्षण करें।
उन्होंने कहा कि काले मृग जहां रहते हैं, वह पुण्य भूमि है। यहां साइबेरियन पक्षी आते हैं। हमारी संस्कृति में कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादे ए…’ जैसे लोकगीतों और दैवीय पूजा में भी पक्षियों को बड़ा महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है, इसलिए हम मानवता के संरक्षण के लिए जिएं और पशु— पक्षियों से प्रेम करें।
पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल ने कहा कि तालछापर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण पक्षी विहार स्थलों में से एक है। हमें इसके संरक्षण और संवर्धन पर फोकस करना होगा। पक्षी उत्सव जैसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संतोष मेघवाल ने कहा कि ‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके’ के भाव के साथ हम पशु— पक्षियों के संरक्षण के लिए हम सभी खड़े हों। हम सभी एकजुट होकर हमारी समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को बचाएं।
अतिथियों ने अभयारण्य में लगाई गई राजीविका शिल्प व खाद्य बाजार, उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र द्वारा लगाई गई ‘एक जिला — एक उत्पाद’ नीति आधारित स्टॉल का अवलोकन कर उत्पादों की सराहना की।
इस मौके पर डीएफओ भवानी सिंह, छापर ईओ भवानी शंकर व्यास सहित नगरपालिका टीम व वन विभाग के अधिकारियों कार्मिकों ने अतिथियों का स्वागत किया।
डीएफओ भवानी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पक्षी उत्सव की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृष्णमृगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है। सभी के सहयोग से हम तालछापर की जैव विविधता का और संरक्षण करेंगें।
इस दौरान राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ का सामूहिक गान किया गया।
इस दौरान लिट्टू कल्पनाकांत, सीताराम मीणा, सुगन मंडार, घनश्याम नाथ कच्छावा, मनीष रिणवा, सविता राठी, बीदासर एसडीएम अमीलाल यादव, एसीईओ भागचंद खारिया, श्यामसुंदर, उद्योग महाप्रबंधक उजाला, एसीएफ महेंद्र लेखाला, क्रांति सिंह, पार्थ सोनी, मनीष कुमार, तहसीलदार गिरधारी पारीक, अमरसिंह, बीडीओ रवि कुमार, राजूराम, बाबूलाल, सुरेंद्र मीणा, चैनरूप दायमा, जयश्री दाधीच, मुकेश सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन चंद्रशेखर पारीक ने किया।
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से
इस मौके पर सेवानिवृत्त डीएफओ सूरत सिंह पूनिया, डॉ अनिल छंगाणी, ममता शर्मा, समीर सिंह, केसी सोनी, अरविंद कुमार आदि पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षियों की दुनिया से जुड़ी रोचक जानकारी साझा की।
रेंजर उमेश बागोतिया ने बताया कि पक्षी दर्शन यात्रा के दौरान ब्लैक शोल्डर्ड काईट, लेगर फाल्कन, रेड नेक्ड फाल्कन, इजिप्शन वल्चर, हिमालयन ग्रीफन वल्चर, यूरेशियन ग्रीफन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, पैलेड हैरियर, मोंटेग्यू हैरियर, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन कैस्टल,
चेस्नेट बैलिड सैंड ग्राउज, व्हाइट ब्राउड फैंटेल, ब्राउन रॉकचैट, यूरेशियन कलर्ड डव, स्पॉटेड ऑऊलेट, इंडियन स्कोप्स ओवल, कॉमन कूट, लिटिल ग्रेब, नॉर्थन स्वाउलर, इंडियन स्पॉट बिल्ड डक आदि पक्षी देखे गए।इन पक्षियों के अलावा कृष्णमृग, चिंकारा, नीलगाय, डेजर्ट फॉक्स, डेजर्ट कैट, जैकाल, जंगली सुअर, जंगली बिल्ली, खरगोश आदि वन्यजीव देखे गए।
आयोजित हुई विभिन्न गतिविधियां, विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
पक्षी उत्सव — 2026 के पहले दिन निर्देशित पक्षी दर्शन यात्रा, कला फोटो प्रदर्शनी, शिल्प व खाद्य बाजार, वृत्तचित्रों व फिल्मों की स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ वार्ता सत्र, प्रकृति प्रश्नोत्तरी, वन्यजीव व पक्षी चित्रकला प्रतियोगिता, पक्षी व प्रकृति दर्शन सैर आदि गतिविधियां आयोजित की गई। इनमें जिले के विभिन्न कॉलेजों, स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। इसी के साथ आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस दौरान वन विभाग द्वारा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से लगाई गई प्रदेश सरकार की योजनाओं व विकास कार्यों तथा वन विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का आगंतुकों ने अवलोकन किया।
—हमारी संस्कृति में पशु—पक्षियों की सेवा का भाव, संकल्पित प्रयासों से हम जलचर, नभचर और थलचर सभी का करें संरक्षण
तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का हुआ आगाज, रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने की शिरकत
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से, आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं, विद्यार्थियों ने लिया भाग
चूरू, 01 फरवरी। प्रदेश सरकार की पंच गौरव योजना अंतर्गत जिले में ‘एक जिला – एक प्रजाति : खेजड़ी’ के संरक्षण संवर्धन और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में जिले के तालछापर वन्य जीव अभयारण्य में रविवार को तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का आगाज हुआ। इस अवसर पर रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, केसी मालू, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की तथा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गणेश वंदना के साथ गतिविधियों का आगाज हुआ।
रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने कहा कि विकास के साथ हम अपनी जड़ों से जुड़ें तथा पक्षी व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षियों व वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशु—पक्षियों की सेवा का भाव हमारी संस्कृति में है। हम दैनिक गतिविधियों में पक्षियों व पर्यावरण से जुड़े हैं। हमें पशु—पक्षियों की दुनिया को देखें, सीखे और जुड़ें तथा संकल्पित प्रयासों से वन क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास करें।
चूरू विधायक हरलाल सहारण ने कहा कि ‘सिर साटै रुंख़ रहे तो भी सस्तो जाण’ के संकल्प से हम प्रेरणा लें और दैनिक जीवन में प्रकृति व पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लें। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण से हमें पेड़ ही बचा सकते हैं। हम अपनी सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को बचाएं।
उन्होंने कहा कि चूरू जिले में कोड चूरू, पुस्तक संवाद आदि विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। इन्हीं नवाचारों के साथ पक्षी उत्सव का आयोजन भी क्षेत्रीय विशेषताओं के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने कहा कि प्रकृति में हर चीज का उपयोग और महत्व है। मशीन युग आने से प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ हुआ है। हम स्वयं से संकल्प लें और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम करें। पर्यावरण संतुलन के लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और आने वाली पीढ़ी को प्रकृति से जोड़कर पर्यावरणीय संतुलन की आदतों का विकास करें।
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा कि चूरू का ताल छपर वन्यजीव अभयारण्य विश्व की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संजोए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सकारात्मक पहल है और इसमें स्थानीय लोगों की समुचित भागीदारी हो। ताल छापर व यहां मौजूद जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए यहां के लोगों को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। हम सभी प्रकृति व पर्यावरण से जुड़े और हमारी प्राकृतिक विरासत को सहेजें।
उन्होंने कहा कि ताल छापर के नजदीक जसवतंगढ़ में वेटलैंड डवलप किया गया है। इससे वहां भी जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है।
पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। मनुष्य जलचर, नभचर और थलचर सभी का संरक्षण करें। हम जीव हत्या रोकथाम का संकल्प लें और जीव— जंतुओं का संरक्षण करें।
उन्होंने कहा कि काले मृग जहां रहते हैं, वह पुण्य भूमि है। यहां साइबेरियन पक्षी आते हैं। हमारी संस्कृति में कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादे ए…’ जैसे लोकगीतों और दैवीय पूजा में भी पक्षियों को बड़ा महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है, इसलिए हम मानवता के संरक्षण के लिए जिएं और पशु— पक्षियों से प्रेम करें।
पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल ने कहा कि तालछापर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण पक्षी विहार स्थलों में से एक है। हमें इसके संरक्षण और संवर्धन पर फोकस करना होगा। पक्षी उत्सव जैसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संतोष मेघवाल ने कहा कि ‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके’ के भाव के साथ हम पशु— पक्षियों के संरक्षण के लिए हम सभी खड़े हों। हम सभी एकजुट होकर हमारी समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को बचाएं।
अतिथियों ने अभयारण्य में लगाई गई राजीविका शिल्प व खाद्य बाजार, उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र द्वारा लगाई गई ‘एक जिला — एक उत्पाद’ नीति आधारित स्टॉल का अवलोकन कर उत्पादों की सराहना की।
इस मौके पर डीएफओ भवानी सिंह, छापर ईओ भवानी शंकर व्यास सहित नगरपालिका टीम व वन विभाग के अधिकारियों कार्मिकों ने अतिथियों का स्वागत किया।
डीएफओ भवानी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पक्षी उत्सव की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृष्णमृगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है। सभी के सहयोग से हम तालछापर की जैव विविधता का और संरक्षण करेंगें।
इस दौरान राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ का सामूहिक गान किया गया।
इस दौरान लिट्टू कल्पनाकांत, सीताराम मीणा, सुगन मंडार, घनश्याम नाथ कच्छावा, मनीष रिणवा, सविता राठी, बीदासर एसडीएम अमीलाल यादव, एसीईओ भागचंद खारिया, श्यामसुंदर, उद्योग महाप्रबंधक उजाला, एसीएफ महेंद्र लेखाला, क्रांति सिंह, पार्थ सोनी, मनीष कुमार, तहसीलदार गिरधारी पारीक, अमरसिंह, बीडीओ रवि कुमार, राजूराम, बाबूलाल, सुरेंद्र मीणा, चैनरूप दायमा, जयश्री दाधीच, मुकेश सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन चंद्रशेखर पारीक ने किया।
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से
इस मौके पर सेवानिवृत्त डीएफओ सूरत सिंह पूनिया, डॉ अनिल छंगाणी, ममता शर्मा, समीर सिंह, केसी सोनी, अरविंद कुमार आदि पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षियों की दुनिया से जुड़ी रोचक जानकारी साझा की।
रेंजर उमेश बागोतिया ने बताया कि पक्षी दर्शन यात्रा के दौरान ब्लैक शोल्डर्ड काईट, लेगर फाल्कन, रेड नेक्ड फाल्कन, इजिप्शन वल्चर, हिमालयन ग्रीफन वल्चर, यूरेशियन ग्रीफन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, पैलेड हैरियर, मोंटेग्यू हैरियर, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन कैस्टल,
चेस्नेट बैलिड सैंड ग्राउज, व्हाइट ब्राउड फैंटेल, ब्राउन रॉकचैट, यूरेशियन कलर्ड डव, स्पॉटेड ऑऊलेट, इंडियन स्कोप्स ओवल, कॉमन कूट, लिटिल ग्रेब, नॉर्थन स्वाउलर, इंडियन स्पॉट बिल्ड डक आदि पक्षी देखे गए।इन पक्षियों के अलावा कृष्णमृग, चिंकारा, नीलगाय, डेजर्ट फॉक्स, डेजर्ट कैट, जैकाल, जंगली सुअर, जंगली बिल्ली, खरगोश आदि वन्यजीव देखे गए।
आयोजित हुई विभिन्न गतिविधियां, विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
पक्षी उत्सव — 2026 के पहले दिन निर्देशित पक्षी दर्शन यात्रा, कला फोटो प्रदर्शनी, शिल्प व खाद्य बाजार, वृत्तचित्रों व फिल्मों की स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ वार्ता सत्र, प्रकृति प्रश्नोत्तरी, वन्यजीव व पक्षी चित्रकला प्रतियोगिता, पक्षी व प्रकृति दर्शन सैर आदि गतिविधियां आयोजित की गई। इनमें जिले के विभिन्न कॉलेजों, स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। इसी के साथ आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस दौरान वन विभाग द्वारा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से लगाई गई प्रदेश सरकार की योजनाओं व विकास कार्यों तथा वन विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का आगंतुकों ने अवलोकन किया।
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हमारी संस्कृति में पशु—पक्षियों की सेवा का भाव, संकल्पित प्रयासों से हम जलचर, नभचर और थलचर सभी का करें संरक्षण
तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का हुआ आगाज, रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने की शिरकत
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से, आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं, विद्यार्थियों ने लिया भाग
चूरू (दैनिक नवयत्न ) । देश सरकार की पंच गौरव योजना अंतर्गत जिले में ‘एक जिला – एक प्रजाति : खेजड़ी’ के संरक्षण संवर्धन और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में जिले के तालछापर वन्य जीव अभयारण्य में रविवार को तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का आगाज हुआ। इस अवसर पर रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, केसी मालू, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की तथा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गणेश वंदना के साथ गतिविधियों का आगाज हुआ।
रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने कहा कि विकास के साथ हम अपनी जड़ों से जुड़ें तथा पक्षी व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षियों व वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशु—पक्षियों की सेवा का भाव हमारी संस्कृति में है। हम दैनिक गतिविधियों में पक्षियों व पर्यावरण से जुड़े हैं। हमें पशु—पक्षियों की दुनिया को देखें, सीखे और जुड़ें तथा संकल्पित प्रयासों से वन क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास करें।
चूरू विधायक हरलाल सहारण ने कहा कि ‘सिर साटै रुंख़ रहे तो भी सस्तो जाण’ के संकल्प से हम प्रेरणा लें और दैनिक जीवन में प्रकृति व पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लें। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण से हमें पेड़ ही बचा सकते हैं। हम अपनी सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को बचाएं।
उन्होंने कहा कि चूरू जिले में कोड चूरू, पुस्तक संवाद आदि विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। इन्हीं नवाचारों के साथ पक्षी उत्सव का आयोजन भी क्षेत्रीय विशेषताओं के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने कहा कि प्रकृति में हर चीज का उपयोग और महत्व है। मशीन युग आने से प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ हुआ है। हम स्वयं से संकल्प लें और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम करें। पर्यावरण संतुलन के लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और आने वाली पीढ़ी को प्रकृति से जोड़कर पर्यावरणीय संतुलन की आदतों का विकास करें।
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा कि चूरू का ताल छपर वन्यजीव अभयारण्य विश्व की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संजोए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सकारात्मक पहल है और इसमें स्थानीय लोगों की समुचित भागीदारी हो। ताल छापर व यहां मौजूद जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए यहां के लोगों को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। हम सभी प्रकृति व पर्यावरण से जुड़े और हमारी प्राकृतिक विरासत को सहेजें।
उन्होंने कहा कि ताल छापर के नजदीक जसवतंगढ़ में वेटलैंड डवलप किया गया है। इससे वहां भी जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है।
पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। मनुष्य जलचर, नभचर और थलचर सभी का संरक्षण करें। हम जीव हत्या रोकथाम का संकल्प लें और जीव— जंतुओं का संरक्षण करें।
उन्होंने कहा कि काले मृग जहां रहते हैं, वह पुण्य भूमि है। यहां साइबेरियन पक्षी आते हैं। हमारी संस्कृति में कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादे ए…’ जैसे लोकगीतों और दैवीय पूजा में भी पक्षियों को बड़ा महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है, इसलिए हम मानवता के संरक्षण के लिए जिएं और पशु— पक्षियों से प्रेम करें।
पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल ने कहा कि तालछापर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण पक्षी विहार स्थलों में से एक है। हमें इसके संरक्षण और संवर्धन पर फोकस करना होगा। पक्षी उत्सव जैसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संतोष मेघवाल ने कहा कि ‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके’ के भाव के साथ हम पशु— पक्षियों के संरक्षण के लिए हम सभी खड़े हों। हम सभी एकजुट होकर हमारी समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को बचाएं।
अतिथियों ने अभयारण्य में लगाई गई राजीविका शिल्प व खाद्य बाजार, उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र द्वारा लगाई गई ‘एक जिला — एक उत्पाद’ नीति आधारित स्टॉल का अवलोकन कर उत्पादों की सराहना की।
इस मौके पर डीएफओ भवानी सिंह, छापर ईओ भवानी शंकर व्यास सहित नगरपालिका टीम व वन विभाग के अधिकारियों कार्मिकों ने अतिथियों का स्वागत किया।
डीएफओ भवानी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पक्षी उत्सव की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृष्णमृगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है। सभी के सहयोग से हम तालछापर की जैव विविधता का और संरक्षण करेंगें।
इस दौरान राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ का सामूहिक गान किया गया।
इस दौरान लिट्टू कल्पनाकांत, सीताराम मीणा, सुगन मंडार, घनश्याम नाथ कच्छावा, मनीष रिणवा, सविता राठी, बीदासर एसडीएम अमीलाल यादव, एसीईओ भागचंद खारिया, श्यामसुंदर, उद्योग महाप्रबंधक उजाला, एसीएफ महेंद्र लेखाला, क्रांति सिंह, पार्थ सोनी, मनीष कुमार, तहसीलदार गिरधारी पारीक, अमरसिंह, बीडीओ रवि कुमार, राजूराम, बाबूलाल, सुरेंद्र मीणा, चैनरूप दायमा, जयश्री दाधीच, मुकेश सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन चंद्रशेखर पारीक ने किया।
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से
इस मौके पर सेवानिवृत्त डीएफओ सूरत सिंह पूनिया, डॉ अनिल छंगाणी, ममता शर्मा, समीर सिंह, केसी सोनी, अरविंद कुमार आदि पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षियों की दुनिया से जुड़ी रोचक जानकारी साझा की।
रेंजर उमेश बागोतिया ने बताया कि पक्षी दर्शन यात्रा के दौरान ब्लैक शोल्डर्ड काईट, लेगर फाल्कन, रेड नेक्ड फाल्कन, इजिप्शन वल्चर, हिमालयन ग्रीफन वल्चर, यूरेशियन ग्रीफन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, पैलेड हैरियर, मोंटेग्यू हैरियर, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन कैस्टल,
चेस्नेट बैलिड सैंड ग्राउज, व्हाइट ब्राउड फैंटेल, ब्राउन रॉकचैट, यूरेशियन कलर्ड डव, स्पॉटेड ऑऊलेट, इंडियन स्कोप्स ओवल, कॉमन कूट, लिटिल ग्रेब, नॉर्थन स्वाउलर, इंडियन स्पॉट बिल्ड डक आदि पक्षी देखे गए।इन पक्षियों के अलावा कृष्णमृग, चिंकारा, नीलगाय, डेजर्ट फॉक्स, डेजर्ट कैट, जैकाल, जंगली सुअर, जंगली बिल्ली, खरगोश आदि वन्यजीव देखे गए।
आयोजित हुई विभिन्न गतिविधियां, विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
पक्षी उत्सव — 2026 के पहले दिन निर्देशित पक्षी दर्शन यात्रा, कला फोटो प्रदर्शनी, शिल्प व खाद्य बाजार, वृत्तचित्रों व फिल्मों की स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ वार्ता सत्र, प्रकृति प्रश्नोत्तरी, वन्यजीव व पक्षी चित्रकला प्रतियोगिता, पक्षी व प्रकृति दर्शन सैर आदि गतिविधियां आयोजित की गई। इनमें जिले के विभिन्न कॉलेजों, स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। इसी के साथ आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस दौरान वन विभाग द्वारा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से लगाई गई प्रदेश सरकार की योजनाओं व विकास कार्यों तथा वन विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का आगंतुकों ने अवलोकन किया।
—हमारी संस्कृति में पशु—पक्षियों की सेवा का भाव, संकल्पित प्रयासों से हम जलचर, नभचर और थलचर सभी का करें संरक्षण
तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का हुआ आगाज, रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने की शिरकत
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से, आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं, विद्यार्थियों ने लिया भाग
चूरू, 01 फरवरी। प्रदेश सरकार की पंच गौरव योजना अंतर्गत जिले में ‘एक जिला – एक प्रजाति : खेजड़ी’ के संरक्षण संवर्धन और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में जिले के तालछापर वन्य जीव अभयारण्य में रविवार को तालछापर पक्षी उत्सव -2026 का आगाज हुआ। इस अवसर पर रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, चूरू विधायक हरलाल सहारण, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां, पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा, संतोष मेघवाल, नगरपालिका अध्यक्ष श्रवण माली, नीलोफर गौरी, मनभरी देवी, केसी मालू, एडीएम संतोष कुमार मीणा, एसडीएम ओमप्रकाश वर्मा सहित आधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की तथा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गणेश वंदना के साथ गतिविधियों का आगाज हुआ।
रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने कहा कि विकास के साथ हम अपनी जड़ों से जुड़ें तथा पक्षी व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षियों व वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशु—पक्षियों की सेवा का भाव हमारी संस्कृति में है। हम दैनिक गतिविधियों में पक्षियों व पर्यावरण से जुड़े हैं। हमें पशु—पक्षियों की दुनिया को देखें, सीखे और जुड़ें तथा संकल्पित प्रयासों से वन क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास करें।
चूरू विधायक हरलाल सहारण ने कहा कि ‘सिर साटै रुंख़ रहे तो भी सस्तो जाण’ के संकल्प से हम प्रेरणा लें और दैनिक जीवन में प्रकृति व पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा लें। आज के समय में बढ़ते प्रदूषण से हमें पेड़ ही बचा सकते हैं। हम अपनी सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को बचाएं।
उन्होंने कहा कि चूरू जिले में कोड चूरू, पुस्तक संवाद आदि विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। इन्हीं नवाचारों के साथ पक्षी उत्सव का आयोजन भी क्षेत्रीय विशेषताओं के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने कहा कि प्रकृति में हर चीज का उपयोग और महत्व है। मशीन युग आने से प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ हुआ है। हम स्वयं से संकल्प लें और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम करें। पर्यावरण संतुलन के लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और आने वाली पीढ़ी को प्रकृति से जोड़कर पर्यावरणीय संतुलन की आदतों का विकास करें।
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा कि चूरू का ताल छपर वन्यजीव अभयारण्य विश्व की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संजोए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सकारात्मक पहल है और इसमें स्थानीय लोगों की समुचित भागीदारी हो। ताल छापर व यहां मौजूद जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए यहां के लोगों को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। हम सभी प्रकृति व पर्यावरण से जुड़े और हमारी प्राकृतिक विरासत को सहेजें।
उन्होंने कहा कि ताल छापर के नजदीक जसवतंगढ़ में वेटलैंड डवलप किया गया है। इससे वहां भी जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है।
पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध ताल छापर में पक्षी उत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। मनुष्य जलचर, नभचर और थलचर सभी का संरक्षण करें। हम जीव हत्या रोकथाम का संकल्प लें और जीव— जंतुओं का संरक्षण करें।
उन्होंने कहा कि काले मृग जहां रहते हैं, वह पुण्य भूमि है। यहां साइबेरियन पक्षी आते हैं। हमारी संस्कृति में कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादे ए…’ जैसे लोकगीतों और दैवीय पूजा में भी पक्षियों को बड़ा महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है, इसलिए हम मानवता के संरक्षण के लिए जिएं और पशु— पक्षियों से प्रेम करें।
पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल ने कहा कि तालछापर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण पक्षी विहार स्थलों में से एक है। हमें इसके संरक्षण और संवर्धन पर फोकस करना होगा। पक्षी उत्सव जैसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संतोष मेघवाल ने कहा कि ‘पंछी, नदियां, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके’ के भाव के साथ हम पशु— पक्षियों के संरक्षण के लिए हम सभी खड़े हों। हम सभी एकजुट होकर हमारी समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को बचाएं।
अतिथियों ने अभयारण्य में लगाई गई राजीविका शिल्प व खाद्य बाजार, उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र द्वारा लगाई गई ‘एक जिला — एक उत्पाद’ नीति आधारित स्टॉल का अवलोकन कर उत्पादों की सराहना की।
इस मौके पर डीएफओ भवानी सिंह, छापर ईओ भवानी शंकर व्यास सहित नगरपालिका टीम व वन विभाग के अधिकारियों कार्मिकों ने अतिथियों का स्वागत किया।
डीएफओ भवानी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पक्षी उत्सव की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृष्णमृगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और प्रवासी पक्षियों की आवक भी बढ़ी है। सभी के सहयोग से हम तालछापर की जैव विविधता का और संरक्षण करेंगें।
इस दौरान राष्ट्रगीत ‘ वंदे मातरम् ‘ का सामूहिक गान किया गया।
इस दौरान लिट्टू कल्पनाकांत, सीताराम मीणा, सुगन मंडार, घनश्याम नाथ कच्छावा, मनीष रिणवा, सविता राठी, बीदासर एसडीएम अमीलाल यादव, एसीईओ भागचंद खारिया, श्यामसुंदर, उद्योग महाप्रबंधक उजाला, एसीएफ महेंद्र लेखाला, क्रांति सिंह, पार्थ सोनी, मनीष कुमार, तहसीलदार गिरधारी पारीक, अमरसिंह, बीडीओ रवि कुमार, राजूराम, बाबूलाल, सुरेंद्र मीणा, चैनरूप दायमा, जयश्री दाधीच, मुकेश सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन चंद्रशेखर पारीक ने किया।
पक्षी विशेषज्ञों ने साझा किए पक्षियों की दुनिया से जुड़े रोचक किस्से
इस मौके पर सेवानिवृत्त डीएफओ सूरत सिंह पूनिया, डॉ अनिल छंगाणी, ममता शर्मा, समीर सिंह, केसी सोनी, अरविंद कुमार आदि पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षियों की दुनिया से जुड़ी रोचक जानकारी साझा की।
रेंजर उमेश बागोतिया ने बताया कि पक्षी दर्शन यात्रा के दौरान ब्लैक शोल्डर्ड काईट, लेगर फाल्कन, रेड नेक्ड फाल्कन, इजिप्शन वल्चर, हिमालयन ग्रीफन वल्चर, यूरेशियन ग्रीफन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, पैलेड हैरियर, मोंटेग्यू हैरियर, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन कैस्टल,
चेस्नेट बैलिड सैंड ग्राउज, व्हाइट ब्राउड फैंटेल, ब्राउन रॉकचैट, यूरेशियन कलर्ड डव, स्पॉटेड ऑऊलेट, इंडियन स्कोप्स ओवल, कॉमन कूट, लिटिल ग्रेब, नॉर्थन स्वाउलर, इंडियन स्पॉट बिल्ड डक आदि पक्षी देखे गए।इन पक्षियों के अलावा कृष्णमृग, चिंकारा, नीलगाय, डेजर्ट फॉक्स, डेजर्ट कैट, जैकाल, जंगली सुअर, जंगली बिल्ली, खरगोश आदि वन्यजीव देखे गए।
आयोजित हुई विभिन्न गतिविधियां, विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
पक्षी उत्सव — 2026 के पहले दिन निर्देशित पक्षी दर्शन यात्रा, कला फोटो प्रदर्शनी, शिल्प व खाद्य बाजार, वृत्तचित्रों व फिल्मों की स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ वार्ता सत्र, प्रकृति प्रश्नोत्तरी, वन्यजीव व पक्षी चित्रकला प्रतियोगिता, पक्षी व प्रकृति दर्शन सैर आदि गतिविधियां आयोजित की गई। इनमें जिले के विभिन्न कॉलेजों, स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। इसी के साथ आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस दौरान वन विभाग द्वारा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से लगाई गई प्रदेश सरकार की योजनाओं व विकास कार्यों तथा वन विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का आगंतुकों ने अवलोकन किया।
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