सिंधु जल से काटली पुनर्जीवन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा माँग पत्र

बाबूलाल शर्मा
जयपुर/झुंझुनू (दैनिक नवयत्न ) । काटली नदी को पुनर्जीवित करने की माँग को लेकर काटली नदी बचाओ जन अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से राजकीय आवास पर आयोजित जन सुनवाई में मुलाकात कर विस्तृत माँग पत्र सौंपा।
कश्यप ने माँग की कि सिंधु जल समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान को दिए जाने वाले पानी का उपयोग राजस्थान की लुप्तप्राय काटली नदी के पुनर्जीवन हेतु किया जाए। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा सिंधु जल से संबंधित करार रद्द किए जाने के बाद उपलब्ध जल को काटली नदी में बाँध बनाकर तथा पाइपलाइन के माध्यम से प्रवाहित किया जा सकता है।
सरस्वती रूरल एंड अरबन डेवलपमेंट सोसाइटी झुंझुनू के अध्यक्ष सुभाष कश्यप ने माँग पत्र में काटली नदी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने हेतु जी-राम-जी के माध्यम से उपयोगी कार्य करवाने, वृक्षारोपण, भूमि समतलीकरण, सीमांकन तथा नदी क्षेत्र के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में केंद्र सरकार से चंबल, काली सिंध, पार्वती, लूणी, साहबी, घग्घर, काटली, सोती, बनास, बाण सहित अन्य नदियों को आपस में जोड़ने, नदी बहाव क्षेत्र में जल दोहन को नियंत्रित करने, ड्रोन के माध्यम से कृत्रिम वर्षा करवाने तथा काटली नदी की 1947 की राजस्व रिकॉर्ड स्थिति को बहाल करने की माँग की गई। इसके साथ ही आसपास की बंजर, चारागाह एवं वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर वन्य जीव अभ्यारण के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
कश्यप ने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश पर काटली नदी से अतिक्रमण हटाने का महा अभियान जारी है, ऐसे में भविष्य में पुनः अतिक्रमण न हो, इसके लिए प्रभावी और स्थायी रोक की आवश्यकता है। उन्होंने काटली नदी के सहायक नालों व जल स्रोतों को भी अतिक्रमण मुक्त करने की माँग की।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि अतिक्रमण हटाने व आवंटन निरस्त होने से प्रभावित व्यक्तियों की आजीविका के लिए पुनर्वास अथवा आर्थिक सहायता की समुचित व्यवस्था की जाए।
माँग पत्र में उल्लेख किया गया कि वैदिक काल में काटली नदी जयपुर जिले के शाहपुरा क्षेत्र से निकलकर वर्तमान के सीकर, झुंझुनू, चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों से बहते हुए सिंधु नदी में मिलती थी। यह उस समय एक प्रमुख जल मार्ग थी, जिसके किनारे ताम्रकालीन गणेश्वर एवं सुनारी सभ्यताएँ विकसित हुईं, जिनका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से माना जाता है।
कश्यप ने कहा कि वर्तमान में काटली नदी लगभग लुप्त हो चुकी है, लेकिन इसके पुनर्जीवित होने से शेखावाटी क्षेत्र की 80 लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। अंत में उन्होंने राज्य के सभी नदी-नालों और जल स्रोतों के संरक्षण हेतु स्थायी समाधान के रूप में “राजस्थान नदी एवं जल संरक्षण आयोग” के गठन की भी माँग की।

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