डॉ. हस्तीमल आर्य की पुस्तक – “देश के परिवेश में..” का हुआ विमोचन

निसं
सुजानगढ़ (नवयत्न)। मरूदेश संस्थान के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने कहा कि बाल साहित्य वर्तमान युग की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की आदत का विकास बाल साहित्यिक पुस्तकों के माध्यम से हो सकता है। डॉ. घनश्याम नाथ विगत दिवस भारतीय साहित्य विकास न्यास एवं श्री जागृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ कवि डाॅ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ के बाल काव्य संग्रह -देश के परिवेश में ’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। जोधपुर के डाॅ. सावित्री मदन डागा साहित्य भवन में हुए इस समारोह में डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने लेखक डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ की पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें एक चिकित्सक होने के नाते डॉ. आर्य ने बाल मनोविज्ञान का बहुत ध्यान रखा हैं। उन्होंने आगंतुकों से कहा कि बच्चों से अपनी मातृभाषा में बात करने की आदत डालने से हम उनके विरासतन सांस्कृतिक संस्कारों का संरक्षण कर सकेंगे। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने कहा कि बच्चों का साहित्य वह पूंजी है, जिससे राष्ट्र का निर्माण होता है।

विशिष्ट अतिथि संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव रंगकर्मी महेश कुमार पंवार ने कहा कि ‘देश के परिवेश में पुस्तक की संस्कारवान कविताएं बाल मन का सुलभ चित्रण हैं। पुस्तक पर डाॅ. विकास आर्य, शिशु हृदयरोग विशेषज्ञ ने पत्रवाचन किया। समारोह में मंचस्थ प्रसिद्ध लोक गायक कालूराम प्रजापति ने भी अपना सान्निध्य प्रदान किया। समारोह का संचालन मनशाह नायक ने किया। अन्त में श्री जागृति संस्था के अध्यक्ष राजेश भेरवानी ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जाने माने साहित्यकार, शिक्षाविद् डाॅ. प्रगति गुप्ता, चांदकौर जोशी, हंसराज बारासा, जागृति के सचिव श्री हर्षद भाटी, के.के. लालस, धर्मपाल बिस्सा, सुषमा चैहान, नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा, एडवोकेट प्रशांत आर्य, एडवोकेट निंबावत, डाॅ. मनीषा, डागा, सूर्यप्रकाश वर्मा हंसराज चैहान, रमा आर्य, जितेन्द्र जालोरी, ताराराम बौद्ध, डाॅ. कविता डागा, के.के. लालस, बसन्ती पंवार, सुरभि खत्री, लुभास राठौड़, हरि प्रकाश पिपरालिया आदि कई साहित्यकार तथा गणमान्य जन उपस्थित रहे।

You might also like