कनिष्का सुंडा ने रचा इतिहास: राजस्थान यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडल, पहले भी रह चुकी हैं केंद्रीय विद्यालय टॉपर
सपना शर्मा
जयपुर (नवयत्न) । दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के बल पर सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते हुए कनिष्का सुंडा ने एक बार फिर अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम रोशन किया है। कनिष्का ने राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर ऑफ आर्ट्स (इंटरनेशनल रिलेशन एंड एरिया स्टडीज) में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया है। यह सम्मान उन्हें 35वें दीक्षांत समारोह में प्रदान किया गया।
सीकर जिले के छोटे से गाँव कुदन की निवासी कनिष्का सुंडा एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता संजय सुंडा एवं माता मनीषा ने हमेशा उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया और हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया। उनके दादा जी पन्ने सिंह एक उत्कृष्ट अध्यापक रहे हैं, जिनसे कनिष्का को शिक्षा, अनुशासन और मूल्यपरक जीवन की प्रेरणा मिली।
उल्लेखनीय है कि कनिष्का की यह उपलब्धि वर्षों की कठिन मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है। इससे पहले भी वह केंद्रीय विद्यालय जयपुर में वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर टॉप कर चुकी हैं। सीमित संसाधनों और हिंदी माध्यम पृष्ठभूमि के बावजूद इंग्लिश माध्यम की चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी और निरंतर उत्कृष्टता की ओर बढ़ती रहीं।
कनिष्का की सफलता में उनके परिवार, शिक्षकों और विशेष रूप से उनकी बूआ डॉ. प्रीती चंद्रा (IPS) की प्रेरणा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एक सशक्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में डॉ. प्रीती चंद्रा की उपलब्धियों ने कनिष्का के भीतर देश सेवा का जज्बा जगाया और उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि कनिष्का ने भी अपने जीवन का लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर समाज और राष्ट्र की सेवा करना तय किया है।
कुदन गाँव प्रतिभाओं की धरती के रूप में जाना जाता है, जहाँ शिक्षा, राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में अनेक युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कनिष्का की यह उपलब्धि उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
कनिष्का की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक सशक्त संदेश है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, आत्मविश्वास अटूट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है।
“मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती” “मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन—यही सफलता की असली कुंजी है।” कनिष्का सुंडा की यह उपलब्धि इसी सत्य का जीवंत प्रमाण है।