वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब
महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न)। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर बुधवार को अजीतगढ़ कस्बा राष्ट्रभक्ति, शौर्य और स्वाभिमान के रंग में रंगा नजर आया। महाराणा प्रताप आयोजन समिति अजीतगढ़ के तत्वावधान में आयोजित समारोह में सुबह निकाली गई भव्य शोभायात्रा और वाहन रैली ने पूरे कस्बे को देशभक्ति और गौरव के भाव से सराबोर कर दिया। सैकड़ों युवाओं ने मोटरसाइकिलों पर भगवा ध्वज लहराते हुए महाराणा प्रताप के जयघोष लगाए, जिससे मुख्य बाजार सहित पूरा कस्बा गुंजायमान हो उठा।
महात्मा गांधी पब्लिक स्कूल से रवाना हुई शोभायात्रा में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की आकर्षक प्रतिमा को सुसज्जित वाहन पर विराजमान किया गया। प्रतिमा के पीछे बड़ी संख्या में युवा मोटरसाइकिलों पर सवार होकर “महाराणा प्रताप अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “एकलिंगनाथ की जय” के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा मुख्य बाजार, चौपड़ बाजार, बस स्टैंड सहित कस्बे के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। शोभायात्रा और वाहन रैली के दौरान युवाओं का उत्साह आकर्षण का केंद्र रहा। दोपहर 12 बजे महात्मा गांधी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित जयंती समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया।
समारोह के मुख्य अतिथि बालेंदु सिंह शेखावत ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति आपसी सहयोग और एकता है। संकट की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज में सहयोग, सेवा और समरसता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री जगदीश पारिक ने की कार्यक्रम में पारीक ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल इतिहास के वीर योद्धा नहीं, बल्कि स्वाभिमान, त्याग, राष्ट्रभक्ति और संघर्ष के जीवंत प्रतीक हैं। उनका जीवन आज भी युवाओं को अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
मुख्य वक्ता गढ़टकनेत ठिकाने के ठाकुर भानुप्रताप सिंह ने युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण ही उनके जीवन का सबसे बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशामुक्ति, शिक्षा, सामाजिक समरसता तथा समाज उत्थान के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।कार्यक्रम में सरपंच सुरेन्द्र सिंह सामी, श्रवण सिंह महरौली, शंकर सिंह महरौली, कैप्टन स्वरूप सिंह मंडुस्या, विमल जोशी, विजेन्द्र सिंह मूंडरू, डॉ. महेन्द्र सिंह मानगढ़, जबर सिंह झाड़ली, सेवानिवृत्त कमांडेंट दयाल सिंह, रणवीर सिंह आसपुरा, करण सिंह पृथ्वीपुरा, जसवंत सिंह नांगल, गोविन्द सिंह नाथावत, राजेन्द्र सिंह आसपुरा, पत्रकार जयपाल सिंह सिंगोद, नवरतन सिंह नांगल, हितेन्द्र सिंह दिवराला, रविन्द्र सिंह सीपुर, नवरतन सिंह दिवराला, देवी सिंह हरदास का बास, दीवान सिंह हरदास का बास, संजय सिंह बांकावत, बबलू सिंह हरीपुरा, भरत सिंह लिसाडिया, जी.एल. त्रिवेदी, दिनेश शर्मा, बिहारी शर्मा, प्रभु सिंह मानगढ़, मनोहर सिंह मानगढ़, शंकर सिंह सीपुर, गोविन्द सिंह सीपुर, अजीत सिंह सीपुर, ज्ञान सिंह, सुभाष सिंह, रामरतन सिंह, दशरथ सिंह परोड़ा, राजेन्द्र सिंह महरौली, उगम सिंह नारे, जोग सिंह बुरकुड़ा, शेर सिंह खिरोटी, जोर सिंह बुरकड़ा, दीपेन्द्र सिंह मानगढ़ सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन हमीर सिंह मंडा ने किया। समारोह के संयोजक भंवर सिंह मानगढ़ एवं विशाल सिंह शेखावत ने अतिथियों, का आभार व्यक्त किया।समारोह के अंत में महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने, सामाजिक एकता को मजबूत करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का सामूहिक संकल्प लिया