मानवता का अद्भुत उदाहरण — वर्षों बाद बिछड़ा भाई परिवार से मिला
श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न ) । अपना घर आश्रम के अंतर्गत मानव सेवा, संवेदना और पुनर्वास का एक अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ा एक मंदबुद्धि एवं बोलने-सुनने में असमर्थ युवक आखिरकार अपने परिजनों से मिल गया, जिससे पूरे परिवार में खुशी और भावुकता का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार दिनांक 23 दिसंबर 2024 को महिपाल जी को के पास एक मंदबुद्धि एवं बोलने-सुनने में असमर्थ बालक मिला, जो अपना नाम-पता बताने में पूरी तरह असमर्थ था। मानवता का परिचय देते हुए उन्होंने तुरंत उस युवक का रेस्क्यू करवाकर उसे अपना घर आश्रम बीकानेर के रानी बाजार आश्रम में सुरक्षित पहुंचाया। इसके पश्चात 25 नवंबर 2025 को उस प्रभुजी को अपना घर आश्रम नोखा लाया गया, जहाँ आश्रम परिवार द्वारा उनकी लगातार देखभाल, उपचार एवं पहचान की कोशिशें जारी रखी गईं। आश्रम द्वारा सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स के माध्यम से भी उनके परिजनों तक पहुँचने का प्रयास लगातार किया जा रहा था।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर साझा की गई एक रील ने चमत्कार कर दिया। रील देखने के बाद समीर ने आश्रम से संपर्क कर बताया कि यह उनका छोटा भाई “आमिर खान” है, जो पिछले दो-तीन वर्षों से लापता था। परिवार मूल रूप से का निवासी है। समीर ने बताया कि भाई के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस थाना, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार खोजबीन की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। भाई के घर से जाने के बाद उनकी माताजी की तबीयत भी लगातार खराब रहने लगी थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि “यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि हमारा भाई हमें नोखा-बीकानेर में मिल गया।”
सूचना मिलते ही समीर तुरंत अपना घर आश्रम नोखा पहुँचे, जहाँ आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उन्होंने अपने भाई आमिर खान को खुशीपूर्वक अपने साथ घर ले गए। भाई के मिलने की खुशी में पूरे परिवार की आँखें नम हो गईं और आश्रम परिसर में भी भावुक माहौल बन गया।
इस अवसर पर आश्रम के सचिव सतीश जी झंवर ने कहा — “अपना घर आश्रम केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और संवेदनाओं का परिवार है। यहाँ आने वाला प्रत्येक प्रभुजन हमारे लिए भगवान स्वरूप होता है। जब कोई बेसहारा, भटका हुआ या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति अपने परिवार से बिछड़ जाता है, तब उसका दर्द केवल उसी व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार का होता है।
आज आमिर खान को वर्षों बाद उनके परिवार से मिलते देखना हमारे लिए अत्यंत भावुक और गर्व का क्षण है। जब परिवार की आँखों में खुशी के आँसू दिखाई दिए, तब लगा कि हमारी सेवा सार्थक हुई। यही अपना घर आश्रम की सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ा पुरस्कार है।
हम लगातार सोशल मीडिया, जनसहयोग और सेवा कार्यों के माध्यम से ऐसे प्रभुजनों की पहचान कर उन्हें उनके परिवार तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। समाज का सहयोग और विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि प्रत्येक व्यक्ति मानवता के इस कार्य में थोड़ा भी सहयोग करे, तो न जाने कितने बिछड़े लोग फिर से अपने परिवार तक पहुँच सकते हैं।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा से बढ़कर कोई पूजा नहीं। अपना घर आश्रम आगे भी इसी समर्पण, करुणा और सेवा भावना के साथ निरंतर कार्य करता रहेगा।”
यह घटना न केवल मानवता और सेवा की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि प्रयास सच्चे हों तो सोशल मीडिया और समाज मिलकर किसी के जीवन में खुशियाँ वापस ला सकते हैं।