चीन की मंशा पर प्रश्‍नचिह्न

नई दिल्‍ली 8 मई । कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में पांच महीनों से कोहराम मचाया हुआ है। पांच माह के बाद भी वैज्ञानिक अब तक इसकी दवा बनाने में ही जुटे हैं। पूरी दुनिया में ही वैक्‍सीन बनाने के करीब 150 प्रोजेक्‍ट चल रहे हैं, जिनमें से पांच देशों ने ही अपने यहां पर वैक्‍सीन का क्‍लीनिकल ट्रायल शुरू किया है। इनमें चीन, अमेरिका, इजरायल, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल हैं। भारत भी मई में वैक्‍सीन का क्‍लीनिकल ट्रायल शुरू कर सकता है। कोरोना वायरस को लेकर अमेरिका लगातार सवाल उठाता रहा है। अब इसमें यूरोप के कुछ देश भी शामिल हो गए हैं जो मानते हैं कि चीन से ही ये जानलेवा वायरस पूरी दुनिया में आया और इसकी उत्‍पत्ति की वजह चीन ही है।अमेरिका इसे चीनी वायरस कहकर कोरोना वायरस अटैक करने का आरोप लगा चुका है वहीं, चीन ने भी इस वायरस को अमेरिका की उत्‍पत्ति बताया है। चीन का कहना है कि ये साजिशन चीन में लाकर छोड़ा गया और आज ये पूरी दुनिया में कोहराम मचा रहा है। हालांकि, इन आरोपों-प्रत्‍यारोपों के बीच ये सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि इसकी वजह से चीन को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इस बारे में लंदन के ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत मानते हैं कि चीन ने जिस तरह से सवालों के उठने के बाद अपने यहां के आंकड़ों में बदलाव किया है उससे उस पर संदेह के बादल और अधिक गहरा जाते हैं।

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