RGHS योजना की अव्यवस्थाओं को लेकर कर्मचारियों में रोष, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जय जांगिड़ 

झुंझुनूं (नवयत्न)। राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ मंत्रालयिक कर्मचारी जिला समन्वय समिति, झुंझुनूं ने राजस्थान सरकार की आरजीएचएस (RGHS) योजना में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों को हो रही परेशानियों को लेकर मुख्यमंत्री एवं प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला कलेक्टर झुंझुनूं के माध्यम से प्रेषित किया गया।

समिति के अध्यक्ष राजेश बजाड़, महामंत्री शैतान सिंह तथा कोषाध्यक्ष नरेन्द्र हाडा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कर्मचारियों की पीड़ा को गंभीरता से उठाया गया। ज्ञापन में कहा गया कि RGHS योजना को कर्मचारियों और पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन वर्तमान में यह योजना कर्मचारियों के लिए चिंता और असहायता का कारण बनती जा रही है।

ज्ञापन में बताया गया कि कर्मचारी हर माह अपने वेतन से अंशदान जमा करते हैं, लेकिन बीमारी की स्थिति में अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई अस्पतालों द्वारा योजना के तहत उपचार में आनाकानी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समिति ने कहा कि सीमित वेतन में परिवार का पालन-पोषण करने वाले कर्मचारियों के लिए महंगी चिकित्सा व्यवस्था पहले ही चुनौती बनी हुई है। ऐसे में RGHS जैसी कल्याणकारी योजना से जो उम्मीद थी, वह अब टूटती नजर आ रही है।

ज्ञापन में सवाल उठाया गया कि जब कर्मचारी नियमित रूप से अंशदान जमा कर रहे हैं, तो फिर इलाज के लिए उन्हें दर-दर भटकना क्यों पड़ रहा है। इसे कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

समिति ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—

RGHS योजना को तत्काल प्रभाव से सुचारू रूप से बहाल किया जाए, ताकि कर्मचारियों को समय पर इलाज मिल सके।

जिन कर्मचारियों ने विवश होकर अपनी जेब से इलाज करवाया है, उन्हें शीघ्र पूर्ण भुगतान एवं उचित हर्जाना दिया जाए।

जो अस्पताल योजना की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता समाप्त की जाए।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कर्मचारियों की पीड़ा आक्रोश में बदल सकती है, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

समिति पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र न्यायसंगत निर्णय करेगी।

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