फैक्ट्री संचालकों और मजदूरों ने किया विरोध प्रदर्शन
निसं
जयपुर (नवयत्न) । सांगानेर क्षेत्र के शिकारपुरा रोड, गवार-बामणियां में प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में रंगाई-छपाई उद्योग से जुड़े फैक्ट्री संचालकों और मजदूरों ने गुरुवार को संयुक्त रूप से सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त समय और उचित व्यवस्था उपलब्ध कराए फैक्ट्रियों को सीज किया जा रहा है तथा बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जिससे हजारों मजदूरों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। साथ ही भूखे मरने की नौबत आ रही है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सांगानेर रंगाई-छपाई क्षेत्र का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट ( सीईटीपी) लंबे समय से पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि प्लांट या तो बंद पड़ा रहता है अथवा वर्तमान में केवल 1 एमएलडी क्षमता पर संचालित किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र की आवश्यकता इससे कहीं अधिक है।
फैक्ट्री संचालकों ने बताया कि सीईटीपी में करीब 800 सदस्य हैं, जिन्होंने सदस्य बनने के लिए 15 से 20 लाख रुपये तक का योगदान दिया है। इसके बावजूद वर्तमान में केवल 143 फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति दी गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन 143 फैक्ट्रियों में से लगभग 80 फैक्ट्रियां स्वयं सीईटीपी संचालकों से संबंधित हैं, जिससे अन्य सदस्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सीईटीपी संचालकों की फैक्ट्रियों की किसी सक्षम एवं स्वतंत्र अधिकारी से मौके पर जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक प्रदूषण किन इकाइयों से हो रहा है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच होने पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी फैक्ट्री मालिकों को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं करने के लिए कम से कम तीन माह का समय दिया जाए और उसके बाद ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही पानी शोधन संयंत्र लगाने पर वर्तमान 50 प्रतिशत अनुदान को बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया जाए, ताकि छोटे और मध्यम उद्योग भी आवश्यक उपकरण स्थापित कर सकें। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक फैक्ट्रियों को सीज करने और बिजली कनेक्शन विच्छेद जैसी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई से केवल फैक्ट्री संचालक ही नहीं बल्कि हजारों मजदूरों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। यदि उद्योग बंद होंगे तो बड़ी संख्या में श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस दौरान पंकज गौतम और ओमप्रकाश सैनी ने कहा कि प्रशासन को उद्योगों और मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए तथा निष्पक्ष जांच कर दोषी इकाइयों पर ही कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो फैक्ट्री संचालक और मजदूर संयुक्त रूप से आंदोलन को और तेज करेंगे। इसके लिए उन्हें धरना पदर्शन, आमरण अनशन ओर चाहे सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़े,इसके लिए वह तैयार है।