जैन धर्म जीवन जीने की कला- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
अबूबकर बल्खी
लाडनूं (दैनिक नवयत्न )। जैन तेरापंथ धर्म के 11 वें अधिशास्ता गुरुदेव आचार्य महाश्रमण का भव्य जुलूस के साथ लाडनूं की जैन विश्व भारती में पावन प्रवेश हुआ। आचार्य श्री के प्रवेश अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे हैलीकॉप्टर से लाडनूं पहुंचे जहां उन्होंने सुधर्मा सभा में गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। दोपहर करीब एक बजे ग्राम उत्थान शिविर का अवलोकन कर वहां उपस्थित जनसभा को संबोधित किया।
आचार्य श्री ने विश्व शांति का दिया संदेश:
श्वेतांबर जैन धर्मगुरु आचार्य महाश्रमण ने जैन विश्व भारती प्रवेश पर अपना पहला प्रवचन देते हुए कहा कि यह आचार्य तुलसी के तप भूमि है। सबसे बड़ा मंगल धर्म ही होता है। शास्त्रों में अहिंसा, संयम और तप की साधना को ही मंगल माना गया है यह जिस धर्म के लोग करेंगे उनका मंगल होना निश्चित है। उन्होंने योगक्षेम वर्ष के दौरान होने वाले संतों के प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डाला। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल को जैन धर्म का तप और साधना समझने के लिए दो दिन का समय निकालकर वापस आने का आह्वान भी किया। अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जैन धर्म जीने की कला है। जैन विश्व भारती के माध्यम से त्याग और तपस्या के साथ विश्व भर में इसका प्रकाश फैलाया जा रहा है। अंत में सीएम का प्रवास व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया।
जनसभा में विपक्ष पर निशाना साधा:
इसके बाद मुख्यमंत्री जनसभा कार्यक्रम में पहुंचे जहां उन्होंने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार के दो साल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। पेपर लीक करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने का काम भी किया है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विधानसभा में वो हमारी चुनौती को स्वीकार नहीं कर पाते उनके पांच साल के काम एक तरफ और हमें दो साल के विकास कार्य एक तरफ है। उन्होंने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने का भरोसा भी दिलाया। सीएम ने ग्रामोथान शिविर के अंतर्गत डीडवाना कुचामन जिले में 528 करोड़ रुपए के 71 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर गुलाब चंद कोठारी, भागचंद बरडिया, अध्यक्ष प्रमोद बैद, निर्मल कोटेचा, मंत्री राजेंद्र खटेड, मीडिया प्रभारी अलोक खटेड सहित पदाधिकारी मौजूद रहे। गुरुदेव का जैन विश्व भारती प्रवेश के दौरान पहली पट्टी में सुरेन्द्र प्रीति घोसल, राकेश आरती कठौतिया परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया।