अपहरण-फिरौती का मास्टरमाइंड दुबई में पकड़ा: इंटरपोल की मदद से लाया भारत

निसं
जयपुर (नवयत्न)। व्यापारी नरेन्द्र नाथ दत्ता के अपहरण और करोड़ों रुपए की फिरौती मांगने के मामले में फरार चल रहे मास्टरमाइंड करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी को राजस्थान एजीटीएफ ने इंटरपोल की मदद से दुबई से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को लेकर एजीटीएफ की टीम गुरुवार देर रात जयपुर पहुंची। मामले में उसके तीन साथी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

एडीजी एटीए—एएनटीएफ एवं एजीटीएफ दिनेश एमएन ने बताया कि करण आसवानी के दुबई में छिपे होने की जानकारी मिलने के बाद एजीटीएफ ने उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश शुरू की। आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) जारी कराया गया। इसके बाद यूएई के अबू धाबी स्थित इंटरपोल से लगातार संपर्क और समन्वय किया गया।

आरोपी के डिटेन होने की सूचना मिलने के बाद उसे भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। 31 अगस्त को एएसपी सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में एजीटीएफ की टीम जयपुर से दुबई रवाना हुई। टीम में डीएसपी रविंद्र प्रताप, पुलिस निरीक्षक सुनील जांगिड़ और राम सिंह नाथावत शामिल थे। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और समन्वय पूरा करने के बाद टीम करण आसवानी को अपने कब्जे में लेकर गुरुवार देर रात जयपुर पहुंची।

उन्होंने बताया कि खोह नागोरियान थाने में 21 अगस्त 2025 को व्यापारी नरेन्द्र नाथ दत्ता के अपहरण का मामला दर्ज हुआ था। परिवाद के अनुसार नरेन्द्र नाथ दत्ता 20 अगस्त को जयपुर स्थित अपने घर से वैशाली नगर जाने के लिए निकले थे। उनके साथ परिचित और कार चालक भी था। बाद में मोबाइल बंद आने पर परिजनों को चिंता हुई। अगले दिन उनके मोबाइल से फोन कर बताया गया कि नरेन्द्र नाथ दत्ता का अपहरण कर लिया गया है और उनकी रिहाई के लिए फिरौती की रकम की व्यवस्था करने को कहा गया।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपहृत व्यापारी नरेन्द्र नाथ दत्ता और उनके चालक योगेश को सुरक्षित छुड़ा लिया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पुलिसकर्मी की वर्दी पहनकर नरेन्द्र नाथ दत्ता सहित अन्य लोगों का अपहरण किया था। अपहृत लोगों को अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाकर रखा गया था।

जांच के दौरान पुलिस ने हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका को गिरफ्तार किया। हर्ष गौतम के कब्जे से अपहृत व्यक्तियों की इनोवा क्रिस्टा बरामद की गई। वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट कार भी पुलिस ने जब्त की। जांच में आगरा सहित अन्य स्थानों पर अपहृत लोगों को बंधक बनाकर रखने की जानकारी सामने आई।

जांच में करण आसवानी की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह लगातार फरार रहा। पुलिस जांच में उसके संगठित अपराध के सिंडिकेट से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। न्यायालय से उसके खिलाफ वारंट जारी कराया गया। तलाश तेज होने के बाद पता चला कि करण देश छोड़कर दुबई भाग गया है। इसके बाद एजीटीएफ ने इंटरपोल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश शुरू की और आखिरकार उसे दुबई में पकड़ लिया गया।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी का आपराधिक इतिहास करीब ढाई दशक पुराना है। वर्ष 2000 में मुरलीपुरा थाने में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस अब जयपुर लाकर उससे अपहरण, फिरौती और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में पूछताछ कर रही है।

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