किसानों की निश्चित आमदनी और हितों पर सरकार का जोर

नई दिल्ली,16 मई। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन, एपीएमसी एक्ट और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्राइस एंड क्वालिटी एश्योरेंस जैसे तीन बड़े सुधारों को हरी झंडी देकर न सिर्फ अऩ्नदाता की झोली भरने की राह बना दी बल्कि भारत को दुनिया का प्रमुख खाद्यान्न आपूर्ति का केंद्र बना सकता है। दरअसल यह ऐसा फैसला है जो चुनौती को अवसर का काल बना सकता है।आर्थिक पैकेज की घोषणा के क्रम में तीसरे दिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि और उससे संबद्ध विभिन्न क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्‍चर को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रावधान किए हैं। राहत पैकेज में कृषि क्षेत्र के साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, खाद्य प्रसंस्करण, जड़ी-बूटी, शहद उत्पादन और आपरेशन ग्रीन की कमजोर कडि़यों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। राहत पैकेज में कृषि क्षेत्र के लिए लगभग 1.65 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की। इससे किसान अब ‘कभी भी और कहीं भी’ अपनी उपज बेफिक्र होकर ले जाने और बेचने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा। सरकार इसके लिए एक केंद्रीय कानून लाएगी। इसमें किसानों से सीधे प्रोसेसर, निर्यातक, बड़े खरीददार जुड़ेंगे। कृषि क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्‍चर को मजबूत बनाने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का फंड बनेगा, जो घरेलू किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस करेगा। इससे खाद्यान्न के मामले में देश आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में भी उसकी धाक जमेगी।

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