साधु में धीरता होनी आवश्यक है -आचार्यश्री महाश्रमण
अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न )। शुक्रवार को तेरापंथ के अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में सघन साधना शिविर का शुभारम्भ हुआ, जिसमें देश भर से करीब 300 बालक-बालिकाएं संभागी बने। शुक्रवार को प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने ‘धीर पुरुष का सामर्थ्य’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि साधुत्व का ग्रहण होना अनंतकाल की जीव यात्रा में बहुत बड़ा कदम उठाना होता है। वह कदम कौन अच्छे रूप में उठाता है? इस संदर्भ में शास्त्र में बताया गया है कि जो मनुष्य लिए हुए भार को उठाने में समर्थ होते हैं, तपस्या से उदार होते हैं, तपःप्रधान होते हैं और धीर होते हैं, वे ही साधुत्व को स्वीकार कर सकते हैं। आचार्यश्री ने शिविरार्थियों को आशीष प्रदान करते हुए कहा कि इस शिविर में ज्ञानाराधना के साथ-साथ संयम की साधना भी चले, ऐसा प्रयास करना चाहिए। कक्षाओं में अच्छा ज्ञान ग्रहण करने का प्रयास हो। टीवी, मोबाइल से दूरी हो, अभी यह धर्म रूपी स्कूल है। इस स्कूल में जितना संभव हो गहराई से ज्ञानार्जन का प्रयास हो।शिविरार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्तुत किया तो आचार्यश्री ने उन्हें उत्तरित किया। गुरु सन्निधि में पहुंचे कोलकाता ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।