पीटीआई भर्ती फर्जी डिग्री मामला: हजारों अभ्यर्थियों को दिलवाई फर्जी डिग्रियां-मार्कशीट
निसं
जयपुर (नवयत्न)। शारीरिक शिक्षा अध्यापक (पीटीआई) भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री और अंक तालिकाओं के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने वाले रैकेट के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने मामले में दो वर्ष से फरार चल रहे दस हजार रुपए के इनामी आरोपित रितेश कुमार सिंह (40) निवासी कबीर नगर उत्तर प्रदेश हाल लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को न्यायालय में पेश कर 18 जून तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि आरोपित रितेश कुमार सिंह अपने सहयोगी प्रमोद पारीक के साथ मिलकर पीआर ग्रुप ऑफ एजुकेशनल सर्विसेज, लखनऊ के माध्यम से स्थानीय दलालों की मदद से अभ्यर्थियों को विभिन्न विश्वविद्यालयों की बैक डेट में फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट उपलब्ध करवाता था। एसओजी की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपित ने हजारों अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से विभिन्न कोर्सों की डिग्रियां और अंकतालिकाएं दिलवाने की बात स्वीकार की है।
जांच में सामने आया कि पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 में कई अभ्यर्थियों ने दलालों और विश्वविद्यालय अधिकारियों की मिलीभगत से विभिन्न विश्वविद्यालयों से बैक डेट में डिग्रियां प्राप्त कर भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था। मामले की जांच के बाद एसओजी ने वर्ष 2024 में प्रकरण दर्ज किया था। इस मामले में अब तक ओपीजेएस यूनिवर्सिटी, चूरू और जेएस यूनिवर्सिटी, शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) के चांसलर, संचालक और पूर्व रजिस्ट्रार सहित कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। रितेश की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या 20 हो गई है।
एसओजी के अनुसार अप्रैल 2025 में ओपीजेएस यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई की जानकारी मिलते ही रितेश अपना संस्थान छोड़कर फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह पिछले दो वर्षों से भारत और नेपाल के विभिन्न धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों में छिपकर रह रहा था। न्यायालय से स्थायी वारंट जारी होने के बाद उस पर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार शर्मा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, आगरा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखकर आरोपी को ट्रेस किया और लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। टीम में कांस्टेबल हुकम सिंह, बनवारी लाल और सुनील कुमार शामिल रहे।
एसओजी अब रिमांड अवधि के दौरान आरोपित से फर्जी डिग्री नेटवर्क, दलालों, विश्वविद्यालयों से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले लाभार्थियों के संबंध में पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि मामले में आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा कई अन्य वांछित आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।