नाक भी दांव पर, साख भी… फैसला कल

सुरेंद्र शर्मा 

झुंझुनू (नवयत्न)। नगर परिषद सभापति की कुर्सी का फैसला आज होगा, लेकिन इसके साथ ही दो दिग्गज नेताओं की सियासी प्रतिष्ठा की भी परीक्षा होगी। विधायक राजेंद्र भाम्बू के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ और भाजपा के पक्ष में बोर्ड बनाने की चुनौती है, तो सांसद बृजेंद्र सिंह ओला के लिए कांग्रेस के जनादेश को सभापति की कुर्सी तक पहुंचाने की अग्निपरीक्षा।
60 सदस्यीय नगर परिषद में कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीय 15 पार्षद हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 31 है। यानी कांग्रेस को बहुमत के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त वोट चाहिए, जबकि भाजपा को अपने 15 के अलावा कम से कम 16 पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। यहीं से शुरू होती है असली सियासी बाजी।

आज खुलेगा निष्ठा का राज

अब तक बाड़ाबंदी, बैठकों और दावों के बीच जो तस्वीर पर्दे के पीछे रही, वह आज मतदान के बाद सामने होगी। किस पार्षद ने पार्टी का साथ निभाया और किसने सियासी गणित बदलने में भूमिका निभाई, इसका हिसाब भी आज साफ हो जाएगा।

कुर्सी एक, दावेदार दो खेमे

भाजपा सत्ता में होने का लाभ और विधायक के राजनीतिक प्रभाव के सहारे निर्दलीयों को अपने पाले में लाने की कोशिश में है। वहीं कांग्रेस अपने 30 पार्षदों को एकजुट रखकर महज एक अतिरिक्त समर्थन के सहारे सभापति की कुर्सी हासिल करने की स्थिति में है। निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इसलिए सबसे अहम हो गई है।
आज का मतदान सिर्फ सभापति नहीं चुनेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि झुंझुनू की स्थानीय राजनीति में किस खेमे की पकड़ कितनी मजबूत है। दावे चाहे जिस ओर हों, असली फैसला बंद मतपेटी से निकलेगा और उसके बाद निष्ठा के साथ भीतरघात का चेहरा भी सामने आने की चर्चा तेज होगी।

सूत्रों का दावा : कांग्रेस 39 से नीचे नहीं

सट्टा बाजार की रिपोर्ट पर यदि यकीन किया जाए तो उनके अनुसार कांग्रेस को कम से कम 39 पार्षदों का समर्थन मिलेगा क्रॉस वोटिंग हुई तो आंकड़ा 46 तक पहुंचने की संभावना। वहीं भाजपा रेस से बाहर महज नौटंकी करार दे रहे राजनीतिक जानकार, असली तस्वीर मतदान के बाद ही होगी साफ। यह सिर्फ मतदान से पूर्व के अनुमान है जिसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। इधर, राजनीतिक चर्चाओं में भाजपा के सभापति प्रत्याशी उतारने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मौजूदा संख्या बल में भाजपा की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है।

 

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