भामरा में स्कूल वापसी अभियान का शंखनाद
सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न)। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने और ड्रॉप आउट (स्कूल छोड़ चुके) बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के लिए भामरा गांव में एक विशेष और सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है। गांव के जागरूक युवाओं और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के स्टाफ ने संयुक्त रूप से स्कूल वापसी अभियान (नई सुबह) का आगाज किया है। अभियान के पहले ही दिन टीम के सदस्यों ने गांव के रेतीले रास्तों और तेज धूप की परवाह किए बिना उन घरों में दस्तक दी, जिनके बच्चे लंबे समय से स्कूल से अनुपस्थित चल रहे हैं या जिन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। युवाओं और शिक्षकों ने अभिभावकों से सीधा संवाद कर उन्हें शिक्षा के महत्व से रूबरू कराया और बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। टीम की इस समझाइश का सकारात्मक असर देखने को मिला और कई अभिभावक अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए तैयार हुए।
इस टीम ने संभाली कमान
इस अभियान में गांव के युवा जेपी पटीर, नेतराम माहर, मानकचंद, गौरीशंकर च्यानन सहित राजकीय स्कूल का स्टाफ पूरी मुस्तैदी से जुटा रहा। ग्रामीणों ने युवाओं के इस निस्वार्थ प्रयास का स्वागत किया है।
आगे की राह आसान करेगा बरखा बीएमआर फाउंडेशन
इस मुहिम को धरातल पर लगातार जारी रखने और बच्चों को स्थाई रूप से संबल देने के लिए गांव के युवाओं ने एक अहम घोषणा की है। युवाओं की टोली जल्द ही गांव में बरखा बीएमआर फाउंडेशन की स्थापना करेगी। इस संस्था का उद्देश्य भामरा (बीएमआर) गांव के उन होनहार और जरूरतमंद बच्चों को संभालना होगा जो आर्थिक तंगी या किताबों-संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं पढ़ पाते। इस संबंध में जेपी पटीर ने कहा हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे के भविष्य में रुकावट न बने। यह फाउंडेशन हर उस बच्चे की हर संभव मदद करेगा जो पढ़ना और आगे बढ़ना चाहता है, ताकि गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे।