भारतीय कालगणना की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर भारतीय शिक्षा मंडल की विचार गोष्ठी संपन्न

महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न) । भारतीय शिक्षा मंडल जयपुर प्रांत के युवा गतिविधि प्रमुख डॉ मुकेश शर्मा के सानिध्य में शनिवार को राजकीय बालिका महाविद्यालय श्रीमाधोपुर में भारतीय काल गणना की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए महाविद्यालय प्राचार्य डॉ सांवर माल जाट ने बताया कि डॉ मुकेश शर्मा ने अपने संबोधन में भारतीय पंचांग चंद्रमा, सूर्य तथा नक्षत्रों की गतियों पर आधारित एक अत्यंत विकसित एवं वैज्ञानिक गणितीय प्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर भारतीय काल गणना पर आधारित पंचाग का विमोचन भी किया गया।
स्वत्व पंचांग में भारतीय महीनों को प्रमुखता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिनका निर्धारण प्रकृति एवं खगोलीय घटनाओं के सुसंगत आधार पर होता है। उदाहरण स्वरूप जिस पूर्णिमा के समय चंद्रमा चित्रा नक्षत्र के समीप स्थित होता है, वह चैत्र मास कहलाता है तथा जिस पूर्णिमा पर वह कृत्तिका नक्षत्र के निकट होता है वह कार्तिक मास माना जाता है। वर्तमान में प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर के महीनों को केवल संदर्भ एवं समन्वय की सुविधा के लिए सहायक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी क्रम में भारतीय परंपरा में वर्णित सूर्य के बारह नाम—जैसे चैत्र में धाता तथा वैशाख में अर्यमा—को भी संकेतात्मक रूप से सम्मिलित किया गया है जिससे उपयोगकर्ता भारतीय कालगणना ऋतु-बोध और सांस्कृतिक परंपराओं के मध्य अंतर्निहित वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को सहज रूप में आत्मसात कर सके।
चंद्र पक्षों की स्पष्ट पहचान
पंचांग में कृष्ण और शुक्ल पक्ष को दो अलग-अलग रंगों के माध्यम से दर्शाया गया है। धूसर या गहरा रंग कृष्ण पक्ष को दर्शाता है। जब चंद्रमा का आकार घटता है और अंधकार बढ़ता है जबकि सफेद रंग शुक्ल पक्ष का प्रतीक है, जब चंद्रमा का आकार बढ़ता है और प्रकाश में वृद्धि होती है।
तिथि की घट-बढ़ का सटीक चित्रण
पंचांग में तिथियों के परिवर्तन को भी स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। कई बार एक ही दिन में दो तिथियाँ आ सकती हैं या कोई तिथि लुप्त (क्षय) हो सकती है—इस जटिलता को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है।
सूर्य–चंद्र गति का समन्वय और अधिक मास
सूर्य और चंद्रमा की गतियों के बीच समयांतर के कारण जब चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से पीछे रह जाता है, तब इस अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास (अधिमास) जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया को चित्रों के माध्यम से सरलता से समझाया गया है।
भारतीय ज्योतिष में ‘वार’ की अवधारणा
भारतीय समय-गणना में एक ‘वार’ का निर्धारण सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक माना जाता है। इसके विपरीत, ग्रेगोरियन कैलेंडर में दिन का परिवर्तन रात्रि 12 बजे के बाद होता है। इस मूलभूत अंतर को पंचांग में चित्र के माध्यम से सरल और स्पष्ट रूप में समझाया गया है। स्वत्व पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान- परंपरा, खगोल विज्ञान और जीवनशैली के समन्वय का एक सशक्त प्रयास है जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी में “समय के स्वत्व-बोध” को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस नवाचार की परिकल्पना एवं विकास कार्य डॉ. मुकेश शर्मा (प्रांत युवा गतिविधि प्रमुख, भारतीय शिक्षण मंडल – जयपुर प्रांत) के नेतृत्व में संपन्न हुआ है। सभी का आभार डॉ चंद्र प्रकाश व्यास ने प्रकट किया। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता सेवानिवृत्ति प्रिंसिपल शिवपाल सिंह शेखावत ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ माधव सिंह, भारतीय किसान संघ के महावीर सिंह खर्रा उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ प्रेमचंद वर्मा,डॉ मुकेश कुमार शर्मा, डॉ एस एल जाट, डॉ राजेंद्र बुनकर, डॉ सुरेश समोता डॉ मुकेश बल्डवाल, कन्हैयालाल चौरसिया, ओमप्रकाश पचौरी सहित अनेक समाज के जागरूक लोग उपस्थित रहे।
भारतीय शिक्षण मंडल की गतिविधि
भारतीय शिक्षण मंडल का एक परिचय डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने में कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल एक राष्ट्रीय शैक्षिक एवं वैचारिक संगठन है, जिसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में भारतीयता की स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब शिक्षा प्रणाली विभिन्न बाहरी प्रभावों से प्रभावित हो रही है, ऐसे में भारतीय शिक्षण मंडल भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से एक सशक्त एवं संतुलित शिक्षा मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि मंडल की कार्यप्रणाली अत्यंत संगठित, चरणबद्ध (सोपान आधारित) एवं उद्देश्यपूर्ण है, जिसके अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर योजनाबद्ध ढंग से कार्य संचालित किया जाता है। इस क्रम में उन्होंने मंडल की प्रमुख गतिविधियों, विभिन्न कार्य विभागों तथा संगठनात्मक संरचना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि यह संगठन विद्यालय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक एवं प्रभावी हस्तक्षेप कर रहा है।

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