पिता की हत्या के आरोपी पुत्र को आजीवन कारावास

संजय सोनी 

झुंझुनू (नवयत्न)। जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुनील कुमार पंचौली द्वारा शनिवार को दिये एक निर्णय में अपने पिता की हत्या करने के आरोपी पुत्र किशनलाल पुत्र जगदीश प्रसाद निवासी लूटू पुलिस थाना धनूरी जिला झुंझुनूं को आजीवन कारावास की सजा दी है। मामले के अनुसार परिवादी दीपक ने 10 अप्रैल 2025 को पुलिस थाना धनूरी पर एक रिपोर्ट दी कि 10 अप्रैल 2025 को प्रात: 6:46 बजे उसके पास परिवार के भाई दिलीप का फोन आया व उसने बताया कि उसके पिता जगदीश प्रसाद मरे हुये शराब ठेके के सामने दुकानो के बीच की गली में पड़े हुये है। इस सूचना पर वह झुंझुनूं से चलकर अपने घर आया तो उसके पिता की लाश उसके घर पर रखी हुयी थी जिसको मौके से उसके परिवार के लोग लेकर आये। रिपोर्ट में बताया कि उसके घर पर उसके पिता व उसका छोटा भाई किशनलाल ही रहते थे तथा वह झुंझुनूं में प्राईवेट नौकरी करता है, इसलिये वह व उसकी बहिन झुंझुनूं ही रहते है। उसके पिता के साथ उसका छोटा भाई किशनलाल आये दिन लड़ाई-झगड़ा करता रहता था जिसको उसने काफी बार समझाया पर वह मानता नही था तथा उसके पिता के साथ मारपीट करता रहता था। उसे जानकारी मिली की उसके भाई किशनलाल ने बीती रात को समय करीब 12-1 बजे के बीच में उसके पिता जगदीश प्रसाद के साथ मारपीट कर उनको जान से मार दिया। उसके पिता के साथ मारपीट उसने किसी पत्थर या लकड़ी के गुटके से मारकर हत्या कर दी है आदि। पुलिस ने इस रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर बाद जांच हत्या का चालान आरोपी किशनलाल के विरूद्ध सम्बन्धित न्यायालय में पेश किया। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक रामावतार ढ़ाका ने इस्तगासा पक्ष की तरफ से कुल 19 गवाहान के बयान करवाये तथा 39 दस्तावेज प्रदर्शित करवाते हुये न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपी ने अपने पिता के साथ मारपीट कर उसकी हत्या कर एक जघन्य अपराध किया है। इसलिये उसे सख्त से सख्त सजा दी जाये। विद्धान न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश£ेषण करते हुये अपने निर्णय में लिखा कि आरोपी ने अपने ही पिता कि, जिसने की उसे इस उम्मीद के साथ पाल-पोष कर बड़ा किया कि वह बुढ़ापे में उसका सहारा बनेगा, उसी पिता की हत्या करने जैसे अक्षम्य व जघन्य अपराध कारित कर अपने पिता की जीवन लीला का ही अंत आरोपी द्वारा किया जाना अत्यन्त निन्दनीय व समाज को उद्धेलित करने वाला कृत्य है। आरोपी का यह कृत्य न केवल जघन्य अपराध है बल्कि पारिवारीक एवं सामाजिक मूल्यो के प्रति घोर असंवेदनशीलता और विश्वासघात का भी द्योतक है। न्यायाधीश ने आरोपी को उक्त सजा के साथ-साथ 10 हजार रूपये अर्थदण्ड से भी दण्डित करते हुये यह भी आदेश दिया कि अर्थदण्ड अदा नही करने पर आरोपी को दो माह का कठोर कारावास भुगतना होगा तथा साथ ही न्यायालय ने मृतक किशनलाल के आश्रित विधिक उत्तराधिकारी को पीडि़त प्रतिकर स्कीम के उपबंधो के तहत यदि वे निर्धारित मापदण्ड पूर्ण करते हो तो उन्हे नियमानुसार प्रतिकर राशि दिलवाये जाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झुंझुनूं को भी अनुशंषा की है।

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