आचार्य का जीवन की अनित्यता विषय पर विशेष व्याख्यान

अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न) । जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने सोमवार को जैविभा स्थित सुधर्मा सभा में जीवन की अनित्यता विषय पर सारगर्भित प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि यह संसार परिवर्तनशील है और यहां कोई भी वस्तु स्थायी नहीं है। मनुष्य को इस सत्य को समझकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य श्री ने शरीर, संपत्ति, पद और संबंध को अस्थायी बताया। इन पर अत्यधिक मोह रखना दुःख का कारण बन सकता है। व्यक्ति यदि जीवन की अनित्यता को हृदय में उतार ले तो उसके भीतर वैराग्य और संयम की भावना जागृत हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि समय निरंतर गतिमान है और हर क्षण जीवन कम होता जा रहा है। इसलिए मनुष्य को अपने समय का सदुपयोग करते हुए धर्म, साधना और आत्मचिंतन की ओर अग्रसर होना चाहिए। आचार्य श्री ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन की क्षण भंगुरता को समझकर क्रोध, लोभ, मोह जैसी कषायों से दूर रहना चाहिए और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलना चाहिए। प्रवचन उपरांत जैन विश्व भारती मंत्री सलील लोढ़ा, प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष प्रमोद बैद, महामंत्री निर्मल कोटेचा, मंत्री राजेंद्र खटेड आदि ने गुरुदेव का आशीर्वाद लेते हुए उनके प्रवचनों की अनवरत धारा से अपने जीवन को सार्थक करने वाला बताया।

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