शिक्षकों की विशाल चेतावनी रैली, दमनकारी नीतियों के खिलाफ आर-पार के संघर्ष का ऐलान

नवरतन वर्मा
चूरू (नवयत्न) । राजस्थान शिक्षक संघ (STFI) के प्रांतीय आह्वान पर गुरुवार को जिला मुख्यालय चूरू में शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चेतावनी रैली निकाली। शिक्षक भवन से जिला कलेक्ट्रेट तक निकाली गई रैली में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
रैली से पूर्व शिक्षक भवन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश महामंत्री विजय पोटलिया ने राज्य और केंद्र सरकार पर शिक्षकों के साथ दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कभी टीईटी तो कभी पे-प्रोटेक्शन जैसे मुद्दों के नाम पर शिक्षकों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे अब प्रदेश का शिक्षक वर्ग बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की न्यायोचित मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सभा को प्रांतीय उपाध्यक्ष भंवरलाल कस्वां, संयुक्त मंत्री शुभकरण नैण, संगठन मंत्री रतन सिंह पूनिया, प्रदेश प्रतिनिधि गौरीशंकर सिहाग, रणवीर सहारण, चौथमल चीनिया, महेंद्र सिंह पूनिया, लिखमाराम, निहाल सिंह स्वामी और लूणाराम खारड़िया ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और आम जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है, जिसके चलते शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है।
कार्यकारी जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ और जिला मंत्री वेदपाल मलिक ने कहा कि प्रदेशभर में हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर चुके हैं, जो सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष का संकेत है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों के गुस्से को अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता।
सभा के बाद जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ और जिला मंत्री वेदपाल मलिक के नेतृत्व में शिक्षक भवन से रैली रवाना हुई। रैली में शामिल शिक्षक हाथों में झंडे, बैनर और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए अनुशासित ढंग से आगे बढ़ते रहे। शिक्षकों के नारों से पूरा मार्ग गूंज उठा। रैली का अगला हिस्सा जिला कलेक्ट्रेट पहुंच चुका था, जबकि पिछला हिस्सा बस स्टैंड के पास था।
रैली के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया। ज्ञापन सौंपने के लिए प्रारंभ में केवल 10 प्रतिनिधियों को अनुमति देने पर कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया, लेकिन बाद में सहमति बनने पर 40 शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की विभिन्न मांगों के समाधान की मांग की।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि चूरू जिले के शिक्षकों की बड़ी भागीदारी इस बात का संकेत है कि अब शिक्षक वर्ग सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चुप बैठने वाला नहीं है।

You might also like