सूखती काटली ने बढ़ाई चिंता, सिंधु जल लाने की मांग तेज
जयशंकर जांगिड़
झुंझुनू (नवयत्न)। शेखावाटी क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली काटली नदी आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जयपुर व बीकानेर संभाग के अंतर्गत आने वाले सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों में बहने वाली यह नदी अब धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। वर्तमान पीढ़ी इस नदी को देखने के बजाय केवल इसकी कहानियां ही सुन रही है। नदी के सूखने के पीछे कई गंभीर कारण सामने आए हैं। इनमें वैध व अवैध खनन, अतिक्रमण, जल स्रोतों के प्राकृतिक मार्गों में बदलाव, उद्गम स्थल व सहायक नालों पर कब्जा, एनीकट व बांधों का निर्माण, अत्यधिक जल दोहन, वन क्षेत्र में कमी और जैव विविधता का खत्म होना प्रमुख हैं।
काटली नदी बचाओ जन अभियान शुरू
इस समस्या को देखते हुए झुंझुनूं की सरस्वती रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट सोसायटी ने “काटली नदी बचाओ जन अभियान” शुरू किया है। अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने बताया कि जन जागरूकता के साथ-साथ नदी के पुनर्जीवन के लिए विस्तृत योजना तैयार कर मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन सौंपे गए हैं।
एनजीटी के निर्देश के बाद सरकार सक्रिय
मामले को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया गया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में अमित कुमार और कैलाश मीणा द्वारा याचिका दायर की गई, जिस पर न्यायाधिकरण ने नदी के संरक्षण व संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने ड्रोन सर्वे करवाकर नदी की वर्तमान स्थिति का आकलन किया है और पुनर्जीवन योजना पर काम शुरू किया है। नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी जारी है।
पारंपरिक जल स्रोत खत्म, चुनौती बड़ी
इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अतिक्रमण हटाने से नदी को पुनर्जीवित करना कठिन है, क्योंकि इसके पारंपरिक जल स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में नदी में बने छोटे-बड़े बांध व एनीकट हटाने या उनमें बाहरी जल स्रोत से पानी लाने की जरूरत बताई जा रही है।
सिंधु जल लाने की योजना पर जोर
अभियान के तहत सिंधु जल को काटली नदी में लाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। इसके लिए जोधपुरा सुनारी, हीरवाना, मैनपूरा और बगड़ क्षेत्र में कच्चे बांध बनाकर पानी संचय की योजना प्रस्तावित की गई है। यदि यह योजना लागू होती है, तो क्षेत्र की 80 लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिल सकता है।
पर्यावरण और रोजगार पर पड़ेगा असर
इससे जल स्तर सुधरेगा, जैव विविधता वापस लौटेगी, पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। साथ ही, क्षेत्र से पलायन कर रहे लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
सिंधु जल के लिए मोदी से मिलेंगे
अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने बताया कि उनकी टीम जल्द ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर सिंधु जल को काटली नदी में लाने के लिए मांग पत्र सौंपेगी और नदी के पुनर्जीवन की विस्तृत योजना प्रस्तुत करेगी।
समय रहते कदम नहीं उठाने जरूरी
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो काटली नदी पूरी तरह इतिहास बन जाएगी। वहीं, सही प्रयासों से यह नदी एक बार फिर शेखावाटी की जीवन रेखा बन सकती है।