टॉप 100 कलेक्टर का सम्मान… और झुंझुनू अंधेरे में!

संजय सोनी

झुंझुनू (नवयत्न)। एक तरफ जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग को देश के सर्वश्रेष्ठ 100 कलेक्टरों में शामिल होने का गौरव मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूरा शहर बार-बार बिजली कटौती से जूझ रहा है। विडंबना देखिए—जैसे ही यह सम्मान की खबर सामने आई, उसी समय शहर की बिजली गुल हो गई। यह महज संयोग नहीं, बल्कि सिस्टम की हकीकत बयां करता है।
विद्युत विभाग का हाल यह है कि जैसे ही मौसम विभाग आंधी या बारिश का अलर्ट देता है, सबसे पहले शहर की बिजली काट दी जाती है। ऐसा लगता है कि विभाग जनता को सुविधा देने नहीं, बल्कि खुद को बचाने में ज्यादा व्यस्त है।
शिकायत करना भी किसी चुनौती से कम नहीं। अधिकारियों के फोन या तो बंद मिलते हैं, या लगातार व्यस्त रहते हैं, और अगर फोन उठ भी जाए तो जवाब मिलता है—“1800-180-6565 पर शिकायत दर्ज कराओ।” मानो जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना ही विभाग की नीति बन चुकी हो।
और तो और, जिला प्रशासन द्वारा जारी इमरजेंसी नंबर तक कई बार “नॉट एग्जिस्ट” बताते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आपदा प्रबंधन सिर्फ कागजों में ही है क्या?
आम उपभोक्ता घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर है, लेकिन शिकायतों का समाधान 2-3 दिन बाद होता है, और फिर औपचारिकता निभाने के लिए फोन आता है—“क्या आप संतुष्ट हैं?” यह सीधे-सीधे जनता के साथ मजाक नहीं तो और क्या है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस अंधेरे का एहसास उन तक पहुंचेगा, जिनके दफ्तरों और आवासों में बिजली कभी नहीं जाती? क्या आम आदमी की तकलीफ समझी जाएगी?
अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन और विद्युत विभाग दोनों जवाबदेह बनें। बिजली कटौती पर सख्त नियंत्रण और शिकायतों के निस्तारण के लिए तय समय सीमा लागू हो—वरना “सर्वश्रेष्ठ” का तमगा सिर्फ कागजी साबित होगा।

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