महिला अधिकारिता की अनूठी पहल
जय जांगिड़
झुंझुनूं (नवयत्न)। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक अनोखा और प्रेरणादायक नवाचार देखने को मिला। समाज में बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाने और उन्हें हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकार की निरंतर कोशिशों को मजबूती देते हुए महिला अधिकारिता विभाग ने एक यादगार पहल की। घरडाना कलां के गांव जीता के बास में संध्या देवी व रणजीत सिंह की बेटी अल्का पूनियां की शादी में परंपरा को नया रूप देते हुए युवती को घोड़ी पर सवार कर डीजे की धुनों पर भव्य बिंदोरी निकाली गई।
इस दौरान विभाग के उपनिदेशक विप्लव न्यौला व राजस्थान शिक्षण संस्थान चिडावा की चैयरमैन निकिता थालौर ने नववधू को आशीर्वाद देते हुए संदेश दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
यह गांव पूरे जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। पारंपरिक रूप से बारात में दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बिंदोरी निकालता है, लेकिन यहां बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत इस रिवाज को उलट दिया गया। अल्का पूनियां, जो गांव की एक होनहार बेटी हैं और वर्तमान में विभाग में सुपरवाइजर के पद पर है। बिंदेारी के साथ डीजे की जोरदार धुनें गूंज रही थीं, जिस पर विभाग से जुडी साथिनों, महिला सुपरवाइजर व ग्रामीण महिलाओं ने शानदार डांस किया। इस अवसर पर भाई अमित व भाभी विनीता ने कहा कि हमें हमारी बहन पर गर्व महसूस हो रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक विप्लव न्यौला ने इस अवसर पर कहा, “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। आज अल्का जैसी बेटी घोड़ी पर सवार होकर यह साबित कर रही है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम और सम्मान की हकदार हैं जितने बेटे। यह नवाचार पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करेगा कि लड़कियों को केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक नहीं सीमित रखा जाए, बल्कि उन्हें शिक्षा, करियर और सामाजिक गतिविधियों में आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया जाए
अभियान की सफलता का जीवंत उदाहरण
यह कार्यक्रम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की सफलता का जीवंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। राजस्थान सरकार भी इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। झुंझुनूं जिला, जो शेखावाटी क्षेत्र का हिस्सा है, पहले से ही शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में अपनी पहचान रखता है। ऐसे नवाचार इस क्षेत्र की सकारात्मक सोच को और मजबूत करते हैं।
गांव के बुजुर्गों ने भी इस पहल की सराहना की। अल्का के पिता रणजीत सिंह ने कहा कि हमारे यहां परंपराएं बहुत पुरानी हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें बदलना जरूरी है। अलका की घोड़ी वाली बिंदोरी ने साबित कर दिया कि बेटियां अब बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की शान हैं।” अल्का पूनियां खुद इस मौके पर मुस्कराहट के साथ भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, “मुझे यह मौका मिला, तो मैं महसूस कर रही हूं कि समाज बदल रहा है। लड़कियों को भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए जितना लड़कों को।” इस नवाचार को ‘बेटियों की शाही बिंदोरी’ कहकर साझा कर रहे हैं। अल्का की शादी की यह बिंदोरी सिर्फ एक विवाह समारोह नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है। यह संदेश स्पष्ट है — बेटियां किसी से कम नहीं। वे शिक्षा प्राप्त कर, करियर बनाकर और समाज में योगदान देकर देश का भविष्य संवार सकती हैं। यदि हर गांव, हर परिवार ऐसी सोच अपनाए तो लिंग भेदभाव जल्द ही इतिहास बन जाएगा।
यह रहे उपस्थित
कार्यक्रम में शिक्षिका नीतू न्यौला, विभाग की सुपरवाइजर पूजा कुमारी , मोनिका, सरिता, सुनीता ,रतना, पूजा सामोता, सहायक प्रशासनिक अधिकारी मनोज स्वामी, रेनू सैनी, ममता स्वामी, सहायक लेखाधिकारी गोविंद सिंह व कनिष्ठ सहायक राहुल जांगिड आदि भी कार्यक्रम में शामिल हुए ।